सुनो केजरीवाल सर,
अगर सचमुच आपका घमंड टूट गया है तो,
अगर सचमुच जो कर रहे हो वह नौटंकी नहीं है तो,
अगर सचमुच आप भारतीय राजनीति में एक विकल्प बनना चाहते है तो,
एक उम्मीद/एक आशा बनना चाहते हो तो,
अगर सचमुच अपने रूठे हुए समर्पित कार्यकर्ताओं को मनाना चाहते हो तो,
अगर मनना ही चाहते हो तो,
योगेन्द्र यादव, प्रशांत भुषण, अनंत सिंह,मयंक गाँधी, मीरा सन्याल, संतोष हेगडे
अंजली दमानियाँ, सुच्चा छोटे सिंह को मनाओ
और ना जाने कितने ही ऐसे ही समर्पित सैकड़ों कार्यकर्ताओं को मनाओ,
जो बदलाव की राजनीति के सूत्रधार थे,
जो आपके साथ नहीं आये थे,
आप उनके साथ आये थे अपने स्वार्थ के लिए,
अपने मौकापरस्ती लिए,
वो लोग आये थे देश के राजनीति में एक बदलाव के लिए,
आपमें और उनमें(जो आपके साथ नहीं) बहुत बड़ा फर्क है,
आप अपने स्वार्थ/मौकापरस्ती के लिए किसी के भी साथ गले लग जाते है,
वो पिछले दो सालों से ज्यादा समय से आपसे अलग है,
मगर अपने विचारों के साथ है/अपने आंदोलन के साथ है,
वो किसी भी पार्टी से नहीं जुड़े
जबकि योग्यता, क्षमता और अनुभव में हरतरह से वो आपसे इक्कीस है,
क्या बचा है आपके "आम आदमी पार्टी" में?
स्वार्थी/नाटकबाज/मौकापरस्त लोगों का एक गुट,
जो सत्ता, पवार और पैसा के लिए कितना भी नीचे गीर सकते है,
सच यही है ना ?
अब भी स्वीकार नहीं करोगे क्या?
स्वीकार करो अपने झूठ को, अपनी कमियों को
तब ही निखर पाओगे,
नहीं तो नाम मिट चुका है "आप" का
भारतीय राजनीति के स्लेट से। @ मनोरंजन
अगर सचमुच आपका घमंड टूट गया है तो,
अगर सचमुच जो कर रहे हो वह नौटंकी नहीं है तो,
अगर सचमुच आप भारतीय राजनीति में एक विकल्प बनना चाहते है तो,
एक उम्मीद/एक आशा बनना चाहते हो तो,
अगर सचमुच अपने रूठे हुए समर्पित कार्यकर्ताओं को मनाना चाहते हो तो,
अगर मनना ही चाहते हो तो,
योगेन्द्र यादव, प्रशांत भुषण, अनंत सिंह,मयंक गाँधी, मीरा सन्याल, संतोष हेगडे
अंजली दमानियाँ, सुच्चा छोटे सिंह को मनाओ
और ना जाने कितने ही ऐसे ही समर्पित सैकड़ों कार्यकर्ताओं को मनाओ,
जो बदलाव की राजनीति के सूत्रधार थे,
जो आपके साथ नहीं आये थे,
आप उनके साथ आये थे अपने स्वार्थ के लिए,
अपने मौकापरस्ती लिए,
वो लोग आये थे देश के राजनीति में एक बदलाव के लिए,
आपमें और उनमें(जो आपके साथ नहीं) बहुत बड़ा फर्क है,
आप अपने स्वार्थ/मौकापरस्ती के लिए किसी के भी साथ गले लग जाते है,
वो पिछले दो सालों से ज्यादा समय से आपसे अलग है,
मगर अपने विचारों के साथ है/अपने आंदोलन के साथ है,
वो किसी भी पार्टी से नहीं जुड़े
जबकि योग्यता, क्षमता और अनुभव में हरतरह से वो आपसे इक्कीस है,
क्या बचा है आपके "आम आदमी पार्टी" में?
स्वार्थी/नाटकबाज/मौकापरस्त लोगों का एक गुट,
जो सत्ता, पवार और पैसा के लिए कितना भी नीचे गीर सकते है,
सच यही है ना ?
अब भी स्वीकार नहीं करोगे क्या?
स्वीकार करो अपने झूठ को, अपनी कमियों को
तब ही निखर पाओगे,
नहीं तो नाम मिट चुका है "आप" का
भारतीय राजनीति के स्लेट से। @ मनोरंजन
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