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Friday, June 2, 2017

फिल्म #हिंदीmedium
मार्केटिंग वह चीज़ है जो गंजे को कंघी बेच दे। " कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा" यह लाइन एक मार्केटिंग स्ट्रैटजी थी, क्योंकि पहली फिल्म को देख कर ही पता चल गया था कि कटप्पा को राजमाता ने ऐसा करने को कहा होगा। क्यों कहा होगा यह भी साफ़ था, बाहुबली के सामान पराक्रमी उसका भाई भल्लाल देव राज सिंघासन के लिए लालायित था और उसका पिता उसको हर हाल में राजा बनाना चाहता था। फिल्म की कहानी कथानक में ऐसा कुछ भी नहीं था जिसे हमने/आपने पहले पढ़ा/ देखा/ सुना न हो। मगर फिल्म की  मार्केटिंग जबरदस्त थी, यही कारण है कि फिल्म " बाहुबली -2 " सभी रिकार्डों को तोड़ते हुए हिंदुस्तान की अब तक की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई।  फिल्म ने कितना कमाया इससे मतलब नहीं है, फिल्म बनी ही थी एक " प्रोजेक्ट" की तरह, "प्रोडक्ट" की तरह तो बिकी भी "प्रोडक्ट" की तरह मगर जिस तरह से प्रधानमंत्री/राष्ट्रपति जैसे पदों पर असिन लोगों ने, मंत्रियों ने, नेताओं ने, बुद्धिजीवियों ने, लेखकों ने अपने जुबानों से/अपने कलम से "बाहुबली-2 " फिल्म के कसीदे काढ़े, यह फिल्म उस लायक नहीं है। फिल्म भव्य है मगर भव्य तो सलमान खान की " प्रेम रतन धन पायो" भी थी। फिल्म "बाहुबली -2 " को, इसके नायक प्रभास को, निर्देशक राजमौली को हमारे प्राचीन हिन्दू सम्राटों के सवाहक बनाया गया और हर जुबां में/बच्चे - बच्चे के दिमाग में इनके नाम को घुसेड़ा गया। प्रधानमंत्री/राष्ट्रपति जैसे पदों पर असिन लोगों /मंत्रियों / नेताओं /बुद्धिजीवियों / लेखकों  के  जुबानों से/कलम से अगर किसी फिल्म की चर्चा होनी चाहिए तो वह फिल्म #हिंदीmedium है। इस फिल्म में प्राचीन भारतीय समाज/हिन्दू सम्राट कितने गौरवशाली थे, इसका उल्लेख तो नहीं है मगर वर्तमान के भारतीय समाज के समस्यायों को उभार कर दिखाया गया है। फिल्म #हिंदीmedium में एक तरफ तो हिंदी भाषा के दिनों-दिन होते जा रही पतन को दिखने की कोशिश की गई है वहीं शिक्षा व्यवस्था  में व्याप्त धंधेबाजी/घपलेबाजी/दुकानदारी को साफ़-साफ़ हूबहू दिखाया है, जिसे हममें से अधिकांश लोगों से समय-समय पर अनुभव किया है। फिल्म वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की पहल भी करती है। जब किसी अमीर व्यक्ति का बच्चा सरकारी स्कूल जाने लगेगा तो देश के सरकारी स्कूलों का काया पलट हो जायेगा, साथ ही देश की शिक्षा व्यवस्था भी पटरी पर आ जाएगी। इसके लिए कुछ संपन्न लोगों/सरकारी अधियकारियों/नेताओं/बुद्धिजीवियों को  आगे बढ़ कर पहल करने  की जरूरत है।  इलाहबाद हाईकोर्ट ने शिक्षा सुधार के लिए इसी कदम की पैरवी की।  पूरा देश वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के समस्या से ग्रस्त है, सबलोग इसमें सुधार करने की जरूरत की वकालत कर रहे है। मगर पहल कोई नहीं करना चाहता। पहल करना तो दूर की बात है, अगर कोई साहित्य/कला द्वारा इस पहल करने को उत्साहित किया जा रहा है तो हम इस प्रयास को भी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाने की कोशिश नहीं कर रहे है। हम  प्राचीन भारतीय गौरव गाथा के गुणगान में वर्तमान भारतीय जनमानस के मौलिक समस्यायों की आवाज को दबा देना चाहते है।  अगर ऐसा नहीं होता तो प्रधानमंत्री/राष्ट्रपति जैसे पदों पर असिन लोगों /मंत्रियों / नेताओं /बुद्धिजीवियों / लेखकों  के  जुबानों से/कलम से #हिंदीmedium फिल्म की चर्चा होनी चाहिए थी। @ मनोरंजन 

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