खोखली आवाजें
------------------
कोई मित्र/कोई आत्मज या कोई ऐसा शख्स जो कभी दो जिस्म एक जान हुआ करते थे
वक्त के गर्त में खो जाने के बाद
अचानक किसी दिन उसका फोन आता है
और वह हाल- चाल पूछता है तो
" सब ठीक है" कहना ही पड़ता है
लेकिन फोन रखते ही
दिल के किसी खाली/ खोखले हिस्से में
कुछ अव्यक्त से शब्द गुंजायमान होने लगते है
ऐसे शब्द जो आकार नहीं ले पाते
बस लगता है कि कुछ और भी कहा जाना चाहिए था
या फिर एक सनसनाहट सी
छाती के बीचोबीच से होता हुआ
गले तक आकर रूक सा जाता है
और बाकी के काम आँखें कर देती है।
वह शब्द जो आकार नहीं ले पाता
सिर्फ एक सिसकी/ एक सन्नाटे सा बजता है
उस शब्द का अर्थ ढूंढने की कोशिश की मैंने तो
महसूस हुआ कि
उसे सिर्फ मेरा हाल-चाल नहीं पूछना चाहिए था
उसे कुछ और पूछना चाहिए था
....................@मनोरंजन
------------------
कोई मित्र/कोई आत्मज या कोई ऐसा शख्स जो कभी दो जिस्म एक जान हुआ करते थे
वक्त के गर्त में खो जाने के बाद
अचानक किसी दिन उसका फोन आता है
और वह हाल- चाल पूछता है तो
" सब ठीक है" कहना ही पड़ता है
लेकिन फोन रखते ही
दिल के किसी खाली/ खोखले हिस्से में
कुछ अव्यक्त से शब्द गुंजायमान होने लगते है
ऐसे शब्द जो आकार नहीं ले पाते
बस लगता है कि कुछ और भी कहा जाना चाहिए था
या फिर एक सनसनाहट सी
छाती के बीचोबीच से होता हुआ
गले तक आकर रूक सा जाता है
और बाकी के काम आँखें कर देती है।
वह शब्द जो आकार नहीं ले पाता
सिर्फ एक सिसकी/ एक सन्नाटे सा बजता है
उस शब्द का अर्थ ढूंढने की कोशिश की मैंने तो
महसूस हुआ कि
उसे सिर्फ मेरा हाल-चाल नहीं पूछना चाहिए था
उसे कुछ और पूछना चाहिए था
....................@मनोरंजन
No comments:
Post a Comment
Write here