लाखों बार कही गई किसी बात को,
नकारने में डर तो लगता ही है,
फिर भी जी करता है कि,
फूलों, कलियों और चाँदनी के दूधिया प्रकाश से,
सजाया जाता रहा जिस्म को,
काँटों का झुण्ड लिख दूँ,
कि उलझ जाता है इश्क इसमें,
और लहूलुहान हो जाता है। मनोरंजन
नकारने में डर तो लगता ही है,
फिर भी जी करता है कि,
फूलों, कलियों और चाँदनी के दूधिया प्रकाश से,
सजाया जाता रहा जिस्म को,
काँटों का झुण्ड लिख दूँ,
कि उलझ जाता है इश्क इसमें,
और लहूलुहान हो जाता है। मनोरंजन
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