तुम, मुझे भूल तो ना जाओगे
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जब मुट्ठी से रेत की तरह फिसल रहा होता है रिश्ता,
जब प्यार अपने आखिरी पड़ाव में होता है,
तब एक तड़प/ एक त्रास के रूप में निकलता है जुबां से,
" तुम, मुझे भूल तो ना जाओगे "
ये आग्रह है/ मिन्नत है/ एक लाचार उच्छास है,
बावजूद इसके कि आग्रह करने वाला जानता है,
कि उसके मुट्ठी में अब कुछ भी नहीं बचना है,
सिवा कुछ चिपके हुए रेत के,
पर इस चिपके हुए रेत के सहारे ही,
जिन्दा रहना चाहता है अपने प्रियतम के यादों में,
पानी के खूबसूरत बुलबुले में दिखता रहे अक्स अपना,
ये चाह क्षणिक होता है,
काश ! याद रह जाता वह आँसू/ वह दर्द,
मीठा-मीठा सा ख़्वाब,
छुप कर निहारना, और पकड़े जाने का डर,
खुद से बतियाना और होठों-होठों में मुस्कुराना,
काश याद रह जाता वह डर,
जो उठता था दिल में किसी के रूठ जाने से/ दूर जाने से/ उदास हो जाने से,
वह ख़ुशी/ वह उमंग/ वह उत्साह याद रह जाता,
तो जिंदगी कितनी खूबसूरत होती .......
काश याद रह जाते वे लोग,
जिन्हें ना भुलाने की कसमें खाई थी,
पर याद नहीं रहते वे लोग जो कभी,
जीवन में अमृत के धार की तरह बहा करते थे,
जैसे दिल कोई जख्मों से भरा अंग हो,
जिसके ऊपर की परत उघड़ते रहती है निरंतर,
झरते रहते है उस परत के साथ,
वे सारे शब्द, भाव, एहसास और संवेदनाएँ,
फिर नया परत चढ़ता है,
नए शब्द, नए भाव, नए एहसास और नई संवेदनाएँ,
यह क्रम निरंतर चलते रहता है,
पुराने परत के उखड़ने और नए परत के चढने का,
यह सिलसिला चलते रहता है उम्र भर,
आखिरी साँस ले रहे शख़्स के आँखों में झांक कर देखो,
वहाँ भी वही पानी का बुलबुल होता है,
वही प्रश्न, वही चाह, वही याचना होती है,
"तुम मुझे भूल तो ना जाओगे?" @ मनोरंजन कुमार तिवारी
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जब मुट्ठी से रेत की तरह फिसल रहा होता है रिश्ता,
जब प्यार अपने आखिरी पड़ाव में होता है,
तब एक तड़प/ एक त्रास के रूप में निकलता है जुबां से,
" तुम, मुझे भूल तो ना जाओगे "
ये आग्रह है/ मिन्नत है/ एक लाचार उच्छास है,
बावजूद इसके कि आग्रह करने वाला जानता है,
कि उसके मुट्ठी में अब कुछ भी नहीं बचना है,
सिवा कुछ चिपके हुए रेत के,
पर इस चिपके हुए रेत के सहारे ही,
जिन्दा रहना चाहता है अपने प्रियतम के यादों में,
पानी के खूबसूरत बुलबुले में दिखता रहे अक्स अपना,
ये चाह क्षणिक होता है,
काश ! याद रह जाता वह आँसू/ वह दर्द,
मीठा-मीठा सा ख़्वाब,
छुप कर निहारना, और पकड़े जाने का डर,
खुद से बतियाना और होठों-होठों में मुस्कुराना,
काश याद रह जाता वह डर,
जो उठता था दिल में किसी के रूठ जाने से/ दूर जाने से/ उदास हो जाने से,
वह ख़ुशी/ वह उमंग/ वह उत्साह याद रह जाता,
तो जिंदगी कितनी खूबसूरत होती .......
काश याद रह जाते वे लोग,
जिन्हें ना भुलाने की कसमें खाई थी,
पर याद नहीं रहते वे लोग जो कभी,
जीवन में अमृत के धार की तरह बहा करते थे,
जैसे दिल कोई जख्मों से भरा अंग हो,
जिसके ऊपर की परत उघड़ते रहती है निरंतर,
झरते रहते है उस परत के साथ,
वे सारे शब्द, भाव, एहसास और संवेदनाएँ,
फिर नया परत चढ़ता है,
नए शब्द, नए भाव, नए एहसास और नई संवेदनाएँ,
यह क्रम निरंतर चलते रहता है,
पुराने परत के उखड़ने और नए परत के चढने का,
यह सिलसिला चलते रहता है उम्र भर,
आखिरी साँस ले रहे शख़्स के आँखों में झांक कर देखो,
वहाँ भी वही पानी का बुलबुल होता है,
वही प्रश्न, वही चाह, वही याचना होती है,
"तुम मुझे भूल तो ना जाओगे?" @ मनोरंजन कुमार तिवारी
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