अँग्रेजों ने हमें कलकता, बम्बई ,शिमला, दिल्ली और पोर्ट ब्लेयर जैसे अनेक शहर बना कर दिए, (यहाँ पर और पुराने भारतीय शासकों ने जो बनाया/ विकास किया, उसको नजरअंदाज नहीं कर रहा हूँ, इसलिए बकलोली मत करना कोई, तुलनात्मक विश्लेषण करो, मैं वही करना चाहता हूँ)
मुझे आश्चर्य होता है, क्या सच में वे लूटेरे/ दमनकारी/क्रूर शासक थे? और पिछले 70 साल से जो सरकारें है वह न्यायपूर्ण/ जनसेवक/लोकहितार्थ कार्य कर रही है?अँग्रेज भेद-भाव करते थे, और पिछले 70 सालों से देश के लोगों से शासक वर्ग, भाईचारा का रिश्ता रखे है? कहीं कोई भेद-भाव नहीं है?
विकास की बात करें? विकास तब ज्यादा हुआ था या अब हुआ है? कौन डेढ़ सायना कहता था कि भारत में तब एक सूई तक नहीं बनती थी ? ये कलकता, बम्बई ,शिमला, दिल्ली और पोर्ट ब्लेयर की इमारतें भूत बना जाते थे?कौन फैला रहा है ये सब बातें? भारत में तब सूई भी नहीं बनती थी ! दमन की बात करें? आजादी के बाद जितने लोग हिंसा के शिकार हुए, उतने अंग्रेजों के 200 सालों में भी नहीं हुए थे। ये हिंसा अंग्रेजों ने नहीं हमारे राष्ट्रभक्तों ने कराया था और कराते रहे है।आप एक "जालियावाला बाग़" के नाम पर अब तक रोये जा रहे हो, ऐसे ना जाने कितने "जालियावाला बाग़" आजादी के बाद हो चुके है। थोड़ा पढ़ो और विश्लेषण करो तब पता चलेगा कि अमीर लोगों के लिए तब भी अलग व्यवहार था, गरीब के लिए अलग था। ग़रीबों के खून चूसे जाते थे, अब भी चूसे जाते है, और आगे भी चूसे जाते रहेंगे। ग़रीब तब भी इस्तेमाल करने के चीज़ थे, अब भी है, आगे भी इस प्रवृति के शिकार होते रहेंगे। ये किसी शासक का दोष नहीं है, प्रवृति का दोष है और प्रवृतियाँ, परिवेश के अनुकूल आकार ग्रहण करती है। दुनियाँ के हर हिस्से में गरीबों का शोषण होता था, अब भी होता है और आगे भी होता रहेगा। सोचने की बात यह है कि आप ग़रीब क्यों हो? और ग़रीब हो तो इसका बेहतर इस्तेमाल कैसे कर सकते हो ? आज देश के निर्वाचन चुनावों में 60 -65 प्रतिशत मतदान होता है, इसमें 50 % हिस्सा गरीबों का होता है, 14 % मध्यवर्ग और सिर्फ १% अमीर होता है (एक अनुमान है) तो अब आपको सोचना है कि आप 50 % की तरह सोचोगे या 15% मुस्लिम, 15 % दलित 15 % पिछड़ा और 5 % स्वर्ण के रूप में बँट कर सोचोगे? @ मनोरंजन
मुझे आश्चर्य होता है, क्या सच में वे लूटेरे/ दमनकारी/क्रूर शासक थे? और पिछले 70 साल से जो सरकारें है वह न्यायपूर्ण/ जनसेवक/लोकहितार्थ कार्य कर रही है?अँग्रेज भेद-भाव करते थे, और पिछले 70 सालों से देश के लोगों से शासक वर्ग, भाईचारा का रिश्ता रखे है? कहीं कोई भेद-भाव नहीं है?
विकास की बात करें? विकास तब ज्यादा हुआ था या अब हुआ है? कौन डेढ़ सायना कहता था कि भारत में तब एक सूई तक नहीं बनती थी ? ये कलकता, बम्बई ,शिमला, दिल्ली और पोर्ट ब्लेयर की इमारतें भूत बना जाते थे?कौन फैला रहा है ये सब बातें? भारत में तब सूई भी नहीं बनती थी ! दमन की बात करें? आजादी के बाद जितने लोग हिंसा के शिकार हुए, उतने अंग्रेजों के 200 सालों में भी नहीं हुए थे। ये हिंसा अंग्रेजों ने नहीं हमारे राष्ट्रभक्तों ने कराया था और कराते रहे है।आप एक "जालियावाला बाग़" के नाम पर अब तक रोये जा रहे हो, ऐसे ना जाने कितने "जालियावाला बाग़" आजादी के बाद हो चुके है। थोड़ा पढ़ो और विश्लेषण करो तब पता चलेगा कि अमीर लोगों के लिए तब भी अलग व्यवहार था, गरीब के लिए अलग था। ग़रीबों के खून चूसे जाते थे, अब भी चूसे जाते है, और आगे भी चूसे जाते रहेंगे। ग़रीब तब भी इस्तेमाल करने के चीज़ थे, अब भी है, आगे भी इस प्रवृति के शिकार होते रहेंगे। ये किसी शासक का दोष नहीं है, प्रवृति का दोष है और प्रवृतियाँ, परिवेश के अनुकूल आकार ग्रहण करती है। दुनियाँ के हर हिस्से में गरीबों का शोषण होता था, अब भी होता है और आगे भी होता रहेगा। सोचने की बात यह है कि आप ग़रीब क्यों हो? और ग़रीब हो तो इसका बेहतर इस्तेमाल कैसे कर सकते हो ? आज देश के निर्वाचन चुनावों में 60 -65 प्रतिशत मतदान होता है, इसमें 50 % हिस्सा गरीबों का होता है, 14 % मध्यवर्ग और सिर्फ १% अमीर होता है (एक अनुमान है) तो अब आपको सोचना है कि आप 50 % की तरह सोचोगे या 15% मुस्लिम, 15 % दलित 15 % पिछड़ा और 5 % स्वर्ण के रूप में बँट कर सोचोगे? @ मनोरंजन
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