Followers

Friday, July 21, 2017

सामाजिक कुत्तें

सामाजिक कुत्तें
--------------------
सायं ढलने लगी है,
एक पार्क है,
उसके बगल से गुजर रहा हूँ,
अत्यंत ही मनोरम और शांत वातावरण है,
सिर्फ दो-चार पंक्षियों के चहचहाने से,
नीरवता भंग नहीं होती,
बल्कि एक संगीत सा लगता है,
मन में कुछ विचारों की शृंखलाएँ चल रही है,
मेरे मन में संगीत की कोई नई धुन आकार ले रही है,
मैं बार-बार इसे गुनगुना रहा हूँ,
और आनंद के उत्कर्ष को महसूस कर रहा हूँ,
कि तभी पीछे से कुछ कुत्ते भौंकते हुए,
टूट पड़ते है मुझ पर,
मेरा संगीत बिखर जाता है,
विचारों के शब्द तीतर-बितर हो जाते है,
भय से आक्रांत,
मेरी साँसे कुछ पल के लिए ठहर जाती है,
कुत्ते जा चूके है,
मैं ठीक से साँस लेने लगा हूँ,
मगर जब अपने हृदय के अंदर झाँकता हूँ तो,
वहाँ से वे सारे शब्द/संगीत गायब हो चूके होते है,
सिर्फ खोखलापन/सन्नाटापन पसरा हुआ है,
मेरी आँखों से अनायास ही आँसू बहने लगता है,
यह एक सपना है,
जो कल रात मैंने देखी थी,
वास्तविक जीवन में भी,
अक्सर ऐसे कुत्तों से हमारा/आपका सबका पड़ता होगा,
जो हमारे जीवन के हर संगीत को,
विचारों के हर शब्द को तीतर- बितर करने में लगे है,
हम ऐसे कुत्तों से बहुत त्रस्त है,
हमें ऐसे कुत्तों से बचावो कोई। @ मनोरंजन

No comments:

Post a Comment

Write here