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Wednesday, July 8, 2015

परवरिस (लघु-कथा)

परवरिस (लघु-कथा)
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बहुत देर से नन्ही आरोही अपने पापा से बारिस में खेलने की ज़िद कर रही थी,
उसके पापा उसे समझते हुए बोले "नहीं बेटा, बारिस में खेलेंगे तो हम बिमार पड़ जायेंगे"
आरोही बोली " अगर बिमार पड़ जायेंगे तो टैबलेट ले लेंगे", माँ भी तो बिमार पड़ती है,
तो वह टैबलेट लेकर सो जाती है, और फिर अगले दिन ठीक हो जाती है।
पिता को समझ नहीं आ रहा था की वह अपनी बेटी को कैसे समझाए की, 
उन्हें बिमार पड़ने को इज़ाज़त नहीं है, क्योंकि बिमार पड़ कर एक दिन घर बैठने का मतलब है,
महीने के आखिर में तीन दिन भुखा सोना पड़ेगा। 
फिर पापा बोले " देखो बेटा जब हम बिमार पड़ते है तो काफी कमज़ोर हो जाते है, 
जैसे माँ कई दिनों तक बाहर घुमने नहीं जा पाती है, तुम भी अगर बिमार पड़ोगी तो पार्क में घुमने कैसे जाओगी?
चलो ऐसा करते है की तुम अपना कागज़ का नाव बनाओ, हम बिना बारिस में भींगे, अपना नाव चलाएँगे। 
यह सुन कर नन्ही आरोही खुश हो गई, और दौड़ती हुई जाकर कागज का नाव बनाने लगी। @ मनोरंजन

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