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Thursday, July 9, 2015

बावरा मन(गीत)

बावरा मन(गीत)
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बावरा मन,
सुन बावरे,
ढूंढता है किसे, साँझ-सकेरे,
बावरा मन..........सुन बावरे....
कली, तरुणाई की कुम्भला गई,
भटकते ही भटकते, दोपहर भी आ गई,
झुलस गई पंखुड़ियाँ, नींद से अब जाग रे,
मन बावरे.....
बावरा मन, सुन बावरे।
मिला जो राह में पत्थर,
वो पत्थर पारस हो जाता,
फेंका ना जो तुमने,
तो तेरा भी एक घर होता,
बावरा मन, सुन बावरे............
ढूं ढ़ ता है किसे, साँझ-सकेरे, बावरा मन.......सुन बावरे।@ मनोरंजन

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