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Sunday, December 25, 2016

आदरणीय अटल जी के कलम से।
गीत नहीं गाता हूँ
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बेनकाब चेहरे है, दाग बड़े गहरे है,
टूटता तिलिस्म, आज सच से भय खाता हूँ,
गीत नहीं गाता हूँ।
टूटे हुए सपने की सुने कौन सिसकी,
अंतः की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी,
हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानउऊंगा,
काल के कपाल पर लिखता, मिटाता हूँ,
गीत नया गाता हूँ।

महान कवि भारत रत्न सम्मान से सम्मानित विश्व के उच्च कोटि के राजनीतिज्ञ भूतपूर्व प़धान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई ।
महान शिक्षाविद मानवता के रक्षक हिन्दु विश्व विद्यालय के संस्थापक देश हित के लिए उत्साहित रहने वाले महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी को शत शत नमन करता हूँ ।








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