तुम घर वापस आ जाना
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सुनो,
जब दोस्ती, प्यार,शादी,
कैरीयर, नौकरी
और तुम्हारे आस-पास के
काबिल, कामयाब और सुसंस्कृत
लोगों से मन ऊबने लगे तो,
तुम अपने घर वापस आना,
वह घर जहाँ माँ -पिता
भाई-बहन और अन्य रिश्तेदार है,
वह घर तुम्हारे मन को शीतलता देगा,
क्योंकि इस घर के लोग
भले ही उतने,
काबिल, कामयाब और सुसंस्कृत नहीं है,
मगर वे जानते है तुम्हे सबसे बेहतर,
देखा है उन लोगों ने तुम्हे
लड़खड़ाते हुए/तलमलाते हुए चलना,
गिरना और उठना तुम्हारा,
देखा है,
तुम्हे छोटे निकर में या बिना निकर के,
वे जानते है कि तुम गलतियाँ करते हो,
और जब गलतियाँ करते हो तो
तुम्हारे चेहरे पर जो लिखा होता है,
उसे पढना जानते है,
छुपा नहीं है कुछ भी तुम्हारा उनसे,
इसलिए पुरानी अच्छी-बुरी बातें सोच कर,
संकोच मत करना,
मन में कोई कड़वी याद लाकर,
घर वापस आने का विचार मत त्यागना,
क्योंकि वह शीतल छाँव,
हर वक्त तुम्हे अपने छाती से लगाने को,
व्याकुल रहते है,
सुनो,
तुम्हारा जब भी मन घबराए,
तुम घर वापस आ जाना । @ मनोरंजन
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सुनो,
जब दोस्ती, प्यार,शादी,
कैरीयर, नौकरी
और तुम्हारे आस-पास के
काबिल, कामयाब और सुसंस्कृत
लोगों से मन ऊबने लगे तो,
तुम अपने घर वापस आना,
वह घर जहाँ माँ -पिता
भाई-बहन और अन्य रिश्तेदार है,
वह घर तुम्हारे मन को शीतलता देगा,
क्योंकि इस घर के लोग
भले ही उतने,
काबिल, कामयाब और सुसंस्कृत नहीं है,
मगर वे जानते है तुम्हे सबसे बेहतर,
देखा है उन लोगों ने तुम्हे
लड़खड़ाते हुए/तलमलाते हुए चलना,
गिरना और उठना तुम्हारा,
देखा है,
तुम्हे छोटे निकर में या बिना निकर के,
वे जानते है कि तुम गलतियाँ करते हो,
और जब गलतियाँ करते हो तो
तुम्हारे चेहरे पर जो लिखा होता है,
उसे पढना जानते है,
छुपा नहीं है कुछ भी तुम्हारा उनसे,
इसलिए पुरानी अच्छी-बुरी बातें सोच कर,
संकोच मत करना,
मन में कोई कड़वी याद लाकर,
घर वापस आने का विचार मत त्यागना,
क्योंकि वह शीतल छाँव,
हर वक्त तुम्हे अपने छाती से लगाने को,
व्याकुल रहते है,
सुनो,
तुम्हारा जब भी मन घबराए,
तुम घर वापस आ जाना । @ मनोरंजन
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