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Thursday, March 30, 2017

हमें इनकार है

हमें इनकार है
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देश बदल रहा है,
लोगों की सोच भी बदल रही है,
हम बड़ी तेज़ी से दो धड़ों में बंटते जा रहे है,
एक समर्थन में, एक विरोध में,
हम इतने संकिर्ण क्यों होते जा रहे है?
ये समर्थन या विरोध के अलावा
हमारे जीवन में कुछ और नहीं है क्या?
हमारे दोस्त, हमारे रहवर,
हमारे बच्चें, हमारा परिवार,
हमारा गाँव, गाँव की स्वच्छन्दता,
हमारे मन/मस्तिष्क के अनंत दुनियाँ,
ख्वाबों, ख्वाहिसों और सपनों की दुनियाँ,
मधुर स्मृतियों, दर्द और आँसुओं की दुनियाँ,
हमारे शौक, हमारी खुशियाँ
मिलते-बिछड़ते अपने दिल-ए -अजीजों की दुनियाँ,
ये सब भी तो है हमारे जीवन के हिस्से,
हम इनकार करते है,
आपके किसी भी धड़े में सामिल होने से। @ मनोरंजन 

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