जब आदतें लत बन जाती है
=====================सुना है, वो आज भी रोया है बेज़ार होकर,
जिसके चेहरे पर उदासी देख कर,
मेरे कलेजे के सौ टुकड़े हो जाते है,
पर अफसोस की बात है की,
सिखता नहीं वो अपने गलतियों से कभी,
गलतियाँ करते जाने की ज़िद पर आड़ा है।
अपनी कमजोरियों,
अपनी आदतों के गिरफ्त में जकड़ा,
शब्द उसके कानों तक जाकर वापस हो जाते है,
एक पगलपन सा है,
जिसे महसूस नहीं करना चाहता है,
कई बार जानने की कोशिश की,
उसके हाले--दिल का सबब,
पर बताता नहीं कुछ, मुझसे बोलना ही बंद कर देता ह्है,
और इसतरह,
ना ख़ुद बदलता है, ना मुझे बदलने देता है।
@मनोरँजन
जिसके चेहरे पर उदासी देख कर,
मेरे कलेजे के सौ टुकड़े हो जाते है,
पर अफसोस की बात है की,
सिखता नहीं वो अपने गलतियों से कभी,
गलतियाँ करते जाने की ज़िद पर आड़ा है।
अपनी कमजोरियों,
अपनी आदतों के गिरफ्त में जकड़ा,
शब्द उसके कानों तक जाकर वापस हो जाते है,
एक पगलपन सा है,
जिसे महसूस नहीं करना चाहता है,
कई बार जानने की कोशिश की,
उसके हाले--दिल का सबब,
पर बताता नहीं कुछ, मुझसे बोलना ही बंद कर देता ह्है,
और इसतरह,
ना ख़ुद बदलता है, ना मुझे बदलने देता है।
@मनोरँजन
No comments:
Post a Comment
Write here