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Friday, October 10, 2014

मेरा अस्तित्व
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तुम्हे याद ना करने से,
मेरा बहुत नुकशान होता है,
सीखा है मैने अपने अनुभवों से,
वक्त की खिसकती रेत पर खड़े होकर,
तुम्हे याद ना करने से,
जो आँसू की बूँदें, आँखों से बहते,
अब अंदर ही ज़ब्त हो जाते है,
और करके कोई रसायनिक अभिक्रिया,
तेज़ाब बन जाते है,
ये तेज़ाब,
मेरे अंतःकरण की अनेक सुक्ष्म,
एहसासों और भावनाओं को जलाये जा रहा है,
ये तेज़ाब,
मेरे अंदर से सड़ाये जा रहा है,
मेरी कविताओं के शब्दों को,
बनाये जा रहा है मुझे,
नित खोखला अंदर से,
मिटाए जा रहा है मेरे अस्तित्व को,
मुझे, मेरा होने के एहसास को विस्मृत करने लगा है,
तुम्हे याद ना करने से,
मेरा बहुत नुकशान हो रहा है।......................मनोरंजन

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