मेरी पहचान
=======
क्या मैं मदहोश हूँ नशे में,
जो अपनी हस्ती मिटाए जा रहा हूँ उनके लिये,
जिनके नज़र का पानी मर गया है जाने कबसे,
या हूँ मैं बेगैरत फकीरा कोई,
जो चडा देता है,
अपनी ख़ाक छान कर रोज जमा की गई सारी पूँजी,
उस मंदिर में,
जहाँ के देवों ने मुझे महरूम कर रखा है,
अपने आशीर्वाद से,
क्यामैं हूँ, अपने ही धुन का मतवाला,
कोई बावरा संगीत साधक,
बजाये जा रहा हूँ धुन, बहरों की इस बस्ती में,
या हूँ मैं फ़कत किसी के आँखों का धोखा,
लिपटे हुए चिथड़ों में,
असर्फियां दान करता हूँ,
या हूँ मैं कोई प्रेमी पागल सा,
किसी मरहूम प्रेमिका का,
पुकारता हूँ शिद्धत से की,
मुझे यकीन है, एक दिन वो जाग उठेगी अपने कब्र से,
सुना है आज भी हंसता वो शख़्स मुझ पे,
रोता रहा हूँ जिसके लिये,
जाने कितने सदियों से। @ मनोरंजन
http://manoranjan234.blogspot.in/
No comments:
Post a Comment
Write here