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Tuesday, November 15, 2016

भारत में नोट(500  और 1000 ) बंदी
आर्थिक /सामाजिक असंतुलन, अमीरों का बेहिसाब तरीके से और ज्यादा अमीर होते जाना और प्रतिभा/ योग्यता/क्षमता के होते हुए भी गरीबों का कदम-कदम पर अपने आत्मसम्माम/ अपने सपनों को कुचले जाने से भारत देश के  एक बहुत बड़े वर्ग का विश्वास टूटने लगा था, मन में असंतोष/ निराश भरने लगा था, जिससे यह माध्यम/ निम्न माध्यम वर्ग अपने आप को चारों तरफ से घिरा बेबस /लाचार महसूस कर रहा था, जिसके फलस्वरूप अनगिनित लोग तनावग्रस्त / चिड़चिड़े से होने लगे थे, और यह स्थिति ऐसे  तमाम  लोगों के मन में नकारात्मक भावों को जन्म दे रहा था। मैं भी इन्ही लोगों में से एक हूँ, मैं अक्सर खुली आँखों से  ऐसे ख़्वाब देखता था कि काश मुझे राह चलते कुछ लाख/करोड़ रूपया का बैग मिल जाए, मैं लाख कोशिश करता कि ऐसे ख़्वाब  मेरे मन में ना आये, मगर रोज मैं ऐसी अनेकों स्थितियों के बारे में सोचता कि कैसे मुझे मिल सकते है ये रुपए, इस सोच में किसी अमीर आदमी के दुर्घटना से लेकर अनेक अपराधिक सोच होते थे।कभी कहीं पर देखता/ सुनता कि कैसे किसी ने ईमानदारी से किसी का खोया हुआ मोटा धन वापस कर दिया तो ऐसे समाचार पर यकीं नहीं होता था, और लगता था सब नाटक है, कोई राजनैतिक साजिश है।
मगर मोदी सरकार के एक फैसले ने मेरे मन से ऐसे कुविचारों को ख़त्म कर दिया।मुझे लगने लगा कि जो मैं मेहनत से कमाता हूँ, सिर्फ वही मेरा है, बाकी कहीं करोड़ों रुपए भी रखे है तो वो मेरे लिए  सिर्फ कागज़ का ढ़ेर है।
आज तीन-चार घण्टे  पैसे  निकलने के लिए बैंक के बाहर खड़ा रहा, और अंत में मुझे  पैसे नहीं मिले फिर भी मेरे मन में एक बार भी नहीं आया कि सरकार ने ये कैसा झंझट खड़ा कर दिया। मोदी जी,आपके इस कदम ने आमजन में गर्व का भाव भर दिया है, आपको यह देश सैकड़ों सालों तक याद रखेगा। @ मनोरंजन


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