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Monday, December 22, 2014

काव्यात्मक नहीं मैं

जिंदगी हर रोज़ एक नई कहानी लिखती है,
कभी लबों पर हँसी, कभी आँखों में पानी लिखती है।
कभी कोई उलझन बुनती है, कभी कुछ पल रूहानी लिखती है,
जिंदगी हर रोज़ एक नई कहानी लिखती है।
कभी सुरमई सुबह, कभी तपती दोपहर,
तो कभी साम सुहानी लिखती है,
कभी अँधेरा गहरा, कभी चांद पुरा, कभी चांद के मुख पर हैरानी लिखती है,
जिंदगी हर रोज़ एक नई कहानी लिखती है।@ मनोरंजन

Geet(4)

प्यार झूठा ही सही, एक बार जताने के लिये आ,
मैं नाकाबिले बफा हूँ, ये बात बताने के लिये आ।
हमको मालूम है की हम तेरे अपनों में नहीं,
मेरी ग़ैरियत को ही एक बार आजमाने के लिये आ।@मनोरंजन

तलाब और मछलियाँ

तलाब और मछलियाँ
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तलाब की दोस्ती मछलियों से होती है,
मछुवारों से नहीं,
तलाब क्या कुछ नहीं करता मछलियों के लिये,
आश्रय, अपनापन व प्रेमभरा आंचल देता है,
स्नेह, सहभागिता और स्वच्छंदता देता है,
पोषण और जीवन भी देता है,
रक्षा भी करता है भरसक हर आपदा से,
शिकारी पंक्षियों से,
और अपनी क्षमता और गहराई की हद तक,
कोशिश करता है की डुबो दे उन मछुवारों को,
जो उसके दायरे में आकर,
फांसते है मासूम मछलियों को,
पर अक्सर मछुवारा शातीर होता है,
जनता है तैरना, और मिथ्या दोस्ती की हाथ बढ़ा कर,
मछलियों को फांसने का गूर जनता है,
मछलियाँ, अक्सर नासमझ होती है,
समझ नहीं पाती मछुवारों की योजना,
ज़रा सी प्रलोभन से,
भुल जाती है, उस बेशुमार मोहब्बत को,
और अपनापन को,
जो तलाब देता रहा होता है,
अनन्त काल से,
और फंस जाती है,
मछुवारों के जाल में।@मनोरंजन

विचार

ज़िद और ज़िजीविषा क्या कुछ नहीं कराती,
तमस और तिक्तिता अपने अंदर क्या कुछ नहीं डुबाती,
आज्ञानता, अधूरापन और असंतुष्टि किसे नहीं निगल जाती,
आज सर पीटते है हम निर्दोष मासूमों के जाघन्य कत्लेआम पर,
कसूरवार कौन, गुनाहगार कौन, अब क्या कहें, 
तालिबान की पाकिस्तान, इस वक्त क्या कहें,

thought

Nothing is more painful than failure in life,
Nothing is more joyful than progressing steadly on the way of success in life,
Nothing is more useful thing than time,
No wealth is precious to preserve than quality time spent with friends & dear one,
Life is about to live happily with celebrating every moment,
Nothing is more aweful than being jelous of happiness of your dear one.@ Manoranjan

यादें

अच्छा लगा तुम वापस आए,
ज्यों जेठ में झुलसते नवजात पौधों के लिए,
बारीस की फुहार लाये,
झर--झर कर बह चली आँखें,
ज्यों खाली हो रही हो,
तुम्हारी नई यादों को संजोने के लिये,
अब शिकवा नहीं कोई जिंदगी से,
तुम्हारे एहसास के दर्द से भिगोने को,
सदियों का प्यासा एक दिल लेकर आए है।@ मनोरंजन
हाँ, तुम बढ़ जाओ आगे,
मुझे, मेरे हालात पर छोड़ कर,
मेरे आँसुओं की परवाह की तो,
आँसूं सूख ना पायेंगे तुम्हारे कभी, 
बुला रहा है तुम्हे,
तुम्हारा मुस्कुराता कल ,
उसके आगोश में जाकर भूल जाओगी,
मेरे चेहरे पर हँसी लाने की ज़िद,
भावनाओं का आवेग और प्रवाह ही,
वसूल है मोहब्बत के,
कोशिशें कामयाब नहीं होती,
मोहब्बत के जहां में।@ manoranjan

Saturday, December 20, 2014

मासूम बच्चें नहीं समझते,
गुस्से की भाषा,
इर्ष्या, द्वेष, नफरत की भाषा,
पर मासूम बच्चे समझते है,
प्यार ,दर्द, संवेदनाओं और भावनाओं की भाषा,
मासूम बच्चें रोते है, ज़ीद करते है,
अपनी इच्छा पूरी करने के लिये,
और इच्छा पूरी होने पर लिपट जाते है,
सब गुस्से की भाषा पल भर में भूल कर,
पर बच्चे अक्सर समझ जाते है,
अपने मां--पिता के बेबस आँखों की भाषा,
मैं भी समझता हूँ,
तुम्हारी बेबस आँखों की भाषा,
तुम्हारी संवेदनाओं को समझता हूँ,
बिल्कुल मासूम बच्चों सा मेरा प्यार,
समझ नहीं पाता, तुम्हारे गुस्से की भाषा,
समझ पाता हूँ,
तुम्हारे दर्द और आँसुओं की भाषा,
और रोता हूँ हर पल अपनी सबसे अजीज ख़्वाहिश को पाने के लिये,
यकीन मानो,
मैं जी रहा हूँ,
सिर्फ उस दिन के इंतेज़ार में,
जब लिपट जौऊंगा तुमसे,
बिल्कुल मासूम बच्चों की तरह,
सब भूल कर,
तुम्हारे गुस्सा , क्षोभ और नफरत की भाषा।@ मनोरंजन