अच्छा लगा तुम वापस आए,
ज्यों जेठ में झुलसते नवजात पौधों के लिए,
बारीस की फुहार लाये,
झर--झर कर बह चली आँखें,
ज्यों खाली हो रही हो,
तुम्हारी नई यादों को संजोने के लिये,
अब शिकवा नहीं कोई जिंदगी से,
तुम्हारे एहसास के दर्द से भिगोने को,
सदियों का प्यासा एक दिल लेकर आए है।@ मनोरंजन
ज्यों जेठ में झुलसते नवजात पौधों के लिए,
बारीस की फुहार लाये,
झर--झर कर बह चली आँखें,
ज्यों खाली हो रही हो,
तुम्हारी नई यादों को संजोने के लिये,
अब शिकवा नहीं कोई जिंदगी से,
तुम्हारे एहसास के दर्द से भिगोने को,
सदियों का प्यासा एक दिल लेकर आए है।@ मनोरंजन
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