तलाब और मछलियाँ
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तलाब की दोस्ती मछलियों से होती है,
मछुवारों से नहीं,
तलाब क्या कुछ नहीं करता मछलियों के लिये,
आश्रय, अपनापन व प्रेमभरा आंचल देता है,
स्नेह, सहभागिता और स्वच्छंदता देता है,
पोषण और जीवन भी देता है,
रक्षा भी करता है भरसक हर आपदा से,
शिकारी पंक्षियों से,
और अपनी क्षमता और गहराई की हद तक,
कोशिश करता है की डुबो दे उन मछुवारों को,
जो उसके दायरे में आकर,
फांसते है मासूम मछलियों को,
पर अक्सर मछुवारा शातीर होता है,
जनता है तैरना, और मिथ्या दोस्ती की हाथ बढ़ा कर,
मछलियों को फांसने का गूर जनता है,
मछलियाँ, अक्सर नासमझ होती है,
समझ नहीं पाती मछुवारों की योजना,
ज़रा सी प्रलोभन से,
भुल जाती है, उस बेशुमार मोहब्बत को,
और अपनापन को,
जो तलाब देता रहा होता है,
अनन्त काल से,
और फंस जाती है,
मछुवारों के जाल में।@मनोरंजन
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तलाब की दोस्ती मछलियों से होती है,
मछुवारों से नहीं,
तलाब क्या कुछ नहीं करता मछलियों के लिये,
आश्रय, अपनापन व प्रेमभरा आंचल देता है,
स्नेह, सहभागिता और स्वच्छंदता देता है,
पोषण और जीवन भी देता है,
रक्षा भी करता है भरसक हर आपदा से,
शिकारी पंक्षियों से,
और अपनी क्षमता और गहराई की हद तक,
कोशिश करता है की डुबो दे उन मछुवारों को,
जो उसके दायरे में आकर,
फांसते है मासूम मछलियों को,
पर अक्सर मछुवारा शातीर होता है,
जनता है तैरना, और मिथ्या दोस्ती की हाथ बढ़ा कर,
मछलियों को फांसने का गूर जनता है,
मछलियाँ, अक्सर नासमझ होती है,
समझ नहीं पाती मछुवारों की योजना,
ज़रा सी प्रलोभन से,
भुल जाती है, उस बेशुमार मोहब्बत को,
और अपनापन को,
जो तलाब देता रहा होता है,
अनन्त काल से,
और फंस जाती है,
मछुवारों के जाल में।@मनोरंजन
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