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Saturday, December 20, 2014

मासूम बच्चें नहीं समझते,
गुस्से की भाषा,
इर्ष्या, द्वेष, नफरत की भाषा,
पर मासूम बच्चे समझते है,
प्यार ,दर्द, संवेदनाओं और भावनाओं की भाषा,
मासूम बच्चें रोते है, ज़ीद करते है,
अपनी इच्छा पूरी करने के लिये,
और इच्छा पूरी होने पर लिपट जाते है,
सब गुस्से की भाषा पल भर में भूल कर,
पर बच्चे अक्सर समझ जाते है,
अपने मां--पिता के बेबस आँखों की भाषा,
मैं भी समझता हूँ,
तुम्हारी बेबस आँखों की भाषा,
तुम्हारी संवेदनाओं को समझता हूँ,
बिल्कुल मासूम बच्चों सा मेरा प्यार,
समझ नहीं पाता, तुम्हारे गुस्से की भाषा,
समझ पाता हूँ,
तुम्हारे दर्द और आँसुओं की भाषा,
और रोता हूँ हर पल अपनी सबसे अजीज ख़्वाहिश को पाने के लिये,
यकीन मानो,
मैं जी रहा हूँ,
सिर्फ उस दिन के इंतेज़ार में,
जब लिपट जौऊंगा तुमसे,
बिल्कुल मासूम बच्चों की तरह,
सब भूल कर,
तुम्हारे गुस्सा , क्षोभ और नफरत की भाषा।@ मनोरंजन

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