बचपन में सुने गए कुछ गीत के मुखडे जो आँखों को नम कर देते थे।...................
१. दुई भैया गइला हो देवर, एके काहे हो आइला,
अरे हमार स्वामी क़हाँ बिलमवल् ए देवर जी......
१. दुई भैया गइला हो देवर, एके काहे हो आइला,
अरे हमार स्वामी क़हाँ बिलमवल् ए देवर जी......
........... ये गीत एक देवर के द्वारा अपने भाभी , पर मोहित हो जाने और उसके बाद अपने भाई को जंगल में ले जाकर मार डालने की बेहद दर्द और करुणा से भरी कहानी पर आधारित एक मार्मिक गीत है जो अब भी आँखें नम कर देती है।
२. बाली उमरिया प्रभु जी योगी भैनी जी, दिनवा के करिहे
पार....
...................ये गीत गाँव में आने वाले एक सुन्दर नवजवान योगी जब अपने सारंगी बजा कर गाते थे तो घर में औरतें रोने लगती थी।
पार....
...................ये गीत गाँव में आने वाले एक सुन्दर नवजवान योगी जब अपने सारंगी बजा कर गाते थे तो घर में औरतें रोने लगती थी।
३. कंकड़ चुन-चुन- महल बनायो, लोग कहे घर मेरा जी,
ना यह तेरा, ना यह मेरा, चिड़ियों का है बसेरा जी।..
ना यह तेरा, ना यह मेरा, चिड़ियों का है बसेरा जी।..
यह गीत एक सई फ़कीर गया करते थे। उनकी आवाज़ बहुत खास थी। @ मनोरंजन
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