सतह
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वह अक्सर मेरे सतह पर,
अपनी मौजूदगी का एहसास कराते रहता है,
थोड़ा लड़खड़ाते हुए,
संभलने के प्रयास में,
कभी मुस्कुराता है,
हॅंसने का उपक्रम करता है,
कभी खीझ जाता है,
थोड़ा परेशान सा दिखता है,
फिर मुसकुराते हूए,
जुट जाता है अपने काम में तन्मयता से,
ऐसा लगता है की,
अपने पैरों को मज़बूती से स्थिर करना चाहता है,
मेरे सतह पर,
और जब-जब-नाकाम होता है,
उसका चेहरा दर्द से पीला पड़ जाता,
मुझे एहसास है उसके दर्द का,
पर जब भी मैं हाथ बढ़ा कर उसे पकड़ना चाहता हूँ,
वह फिसल कर दूर छिटक जाता है,
अब उसके प्रयासों और उसके पैरों पर प्रश्न क्यों खड़ा करूं?
शायद मेरे व्यक्तित्व की सतह ही,
फिसलन भरी है। @ मनोरंजन
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वह अक्सर मेरे सतह पर,
अपनी मौजूदगी का एहसास कराते रहता है,
थोड़ा लड़खड़ाते हुए,
संभलने के प्रयास में,
कभी मुस्कुराता है,
हॅंसने का उपक्रम करता है,
कभी खीझ जाता है,
थोड़ा परेशान सा दिखता है,
फिर मुसकुराते हूए,
जुट जाता है अपने काम में तन्मयता से,
ऐसा लगता है की,
अपने पैरों को मज़बूती से स्थिर करना चाहता है,
मेरे सतह पर,
और जब-जब-नाकाम होता है,
उसका चेहरा दर्द से पीला पड़ जाता,
मुझे एहसास है उसके दर्द का,
पर जब भी मैं हाथ बढ़ा कर उसे पकड़ना चाहता हूँ,
वह फिसल कर दूर छिटक जाता है,
अब उसके प्रयासों और उसके पैरों पर प्रश्न क्यों खड़ा करूं?
शायद मेरे व्यक्तित्व की सतह ही,
फिसलन भरी है। @ मनोरंजन
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