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Saturday, January 10, 2015

नदी के दो किनारों सा हमारा जीवन

नदी के दो किनारों सा हमारा जीवन
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तुम्हे लगता है की,
मैं बहुत खुश हूँ अपनी दुनिया में,
और मेरे पास तुम्हारे लिए वक़्त कहाँ होगा,
मैं समझता हूँ की,
अब इस हालात में,
जबकि मैं तुम्हारा नहीं किसी और का हूँ,
एक हद से ज्यादा अतिक्रमण तुम्हारे जीवन में,
मेरे द्वारा तुम पर की गई ज्यादाती होगी,
और इसतरह हम दोनों चले जा रहे,
नदियों के दो किनारो की तरह,
एक दूसरे के बीच अथाह जलधारा को समेटे,
कहीं तुम मेरे तरफ मुड जाती हो,
कहीं मैं तुम्हारी तरफ,
पर हम कहीं मिल नहीं पाते,
और इसतरह हम दोनों प्यासे के प्यासे रह जाते है,
नदियों के दो किनारों की तरह। @ मनोरंजन

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