अज़ीम अपराध
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वह कौन है,
जो इतनी पाकीज़गी से,
मुस्कुरा रहा है,
इस शहर में,
जबकि हर शख़्स परेशां है,
जल रहे है आदमज़ात सरेआम,
और आँसुओं की धार सुखायी जा रही है,
इस शहर में,
और यह शख़्स इतनी बेफ़िक्री से,
गुनगुना रहा है,
पकड़ो उसे की,
इसी शख़्स ने चुरा रखी है,
शहर भर की हंसी/ खुशी,
पेश करो दरमियां-ए-आम में,
संगीनों की नोक पर,
जहां इसके अहल-ए-गुनाह की,
सज़ा मुकरर् होगी। @ मनोरंजन
इस शहर में,
जबकि हर शख़्स परेशां है,
जल रहे है आदमज़ात सरेआम,
और आँसुओं की धार सुखायी जा रही है,
इस शहर में,
और यह शख़्स इतनी बेफ़िक्री से,
गुनगुना रहा है,
पकड़ो उसे की,
इसी शख़्स ने चुरा रखी है,
शहर भर की हंसी/ खुशी,
पेश करो दरमियां-ए-आम में,
संगीनों की नोक पर,
जहां इसके अहल-ए-गुनाह की,
सज़ा मुकरर् होगी। @ मनोरंजन
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