खुशकिस्मत है जो मजबूर है हम
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हम मजबूर है, सुबह में देर से जागने और दौडते-भागते ऑफिस पहुँचने के लिए, इस चक्कर में दो-चार किलोमीटर पैदल भाग लेते है रोज। तो बिना व्ययाम किए सेहत की चिन्ताओं से बेफिक्र है। हम तब भी मजबूर थे, जब पढ़ना शुरू किया था, पढ़-लिख-सीख कर चार पैसे कमाने की मजबूरी में चार अक्षर पढ़ गए।आज ये बात जेहन में अचानक आ गई, क्योंकी एक बहुत पैसे वाले महाशय मुझसे पुछ बैठे की " यार मेरे बच्चे पढ़ना क्यों नहीं चाहते? किसी चीज़ की कमी नहीं है, सब सुविधा देते है, टॉप के स्कूल में नाम लिखाया है, मगर आठवी, दशवी कक्षा में पहुँच कर भी मेरे बच्चे किताब को सही उच्चारण के साथ पढ़ भी नहीं पाते, ममला क्या है?" अब हम उन्हे क्या जबाव देते? हमें तो पता है की अगर किसी चीज़ की कमी नहीं तो भला कोई क्यों पढ़े? हमें ही अगर सब कुछ असानी से मिल जाता तो, हम क्यों पढते? तो मजबूरी में चार अक्षर पढ़ कर साक्षर बन गए। और भी कई मजबूरियाँ है, जिसके वजह से हम शरीफ है, सकुशल है। भुख जब खूब तेज़ लग जाती है, तभी खाना खते है, मजबूरी है, उसके पहले उपलब्ध ही नहीं रहता। निंद से जब आँखे बंद होने लगती है, तो सोने जाते है। ये सब अच्छी सेहत और स्वस्थ्य जीवन के लिए जरूरी चीज़ है, जो हमें मजबूर होकर करना पड़ता है। हम मजबूर है की एक से ज्यादा महिलाओं का खर्च नहीं उठा सकते, और मुफ़्त में कोई महिला मित्र उपलब्ध नहीं होती, इसलिए हम पत्नीव्रता है,और एकल गामी पति है। कहने की जरूरत नहीं की ये मजबूरी हमें कितने सारे संकटों से बचाती है।एक बार उसने भी कहा था की " ये मत समझो की तुम बहुत शरीफ हो, सच तो ये है की, तुम्हे मौका नहीं मिला"............................... हम मजबूर है, इसलिए खुशकिस्मत है, अगर मजबूर ना होते तो दुनिया के सबसे बिगडैल राजकुमार होते।@ मनोरंजन
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हम मजबूर है, सुबह में देर से जागने और दौडते-भागते ऑफिस पहुँचने के लिए, इस चक्कर में दो-चार किलोमीटर पैदल भाग लेते है रोज। तो बिना व्ययाम किए सेहत की चिन्ताओं से बेफिक्र है। हम तब भी मजबूर थे, जब पढ़ना शुरू किया था, पढ़-लिख-सीख कर चार पैसे कमाने की मजबूरी में चार अक्षर पढ़ गए।आज ये बात जेहन में अचानक आ गई, क्योंकी एक बहुत पैसे वाले महाशय मुझसे पुछ बैठे की " यार मेरे बच्चे पढ़ना क्यों नहीं चाहते? किसी चीज़ की कमी नहीं है, सब सुविधा देते है, टॉप के स्कूल में नाम लिखाया है, मगर आठवी, दशवी कक्षा में पहुँच कर भी मेरे बच्चे किताब को सही उच्चारण के साथ पढ़ भी नहीं पाते, ममला क्या है?" अब हम उन्हे क्या जबाव देते? हमें तो पता है की अगर किसी चीज़ की कमी नहीं तो भला कोई क्यों पढ़े? हमें ही अगर सब कुछ असानी से मिल जाता तो, हम क्यों पढते? तो मजबूरी में चार अक्षर पढ़ कर साक्षर बन गए। और भी कई मजबूरियाँ है, जिसके वजह से हम शरीफ है, सकुशल है। भुख जब खूब तेज़ लग जाती है, तभी खाना खते है, मजबूरी है, उसके पहले उपलब्ध ही नहीं रहता। निंद से जब आँखे बंद होने लगती है, तो सोने जाते है। ये सब अच्छी सेहत और स्वस्थ्य जीवन के लिए जरूरी चीज़ है, जो हमें मजबूर होकर करना पड़ता है। हम मजबूर है की एक से ज्यादा महिलाओं का खर्च नहीं उठा सकते, और मुफ़्त में कोई महिला मित्र उपलब्ध नहीं होती, इसलिए हम पत्नीव्रता है,और एकल गामी पति है। कहने की जरूरत नहीं की ये मजबूरी हमें कितने सारे संकटों से बचाती है।एक बार उसने भी कहा था की " ये मत समझो की तुम बहुत शरीफ हो, सच तो ये है की, तुम्हे मौका नहीं मिला"............................... हम मजबूर है, इसलिए खुशकिस्मत है, अगर मजबूर ना होते तो दुनिया के सबसे बिगडैल राजकुमार होते।@ मनोरंजन
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