Followers

Monday, April 6, 2015

होनी-अनहोनी

होनी-अनहोनी
......................
दुर्योधन अगर पूर्ण नग्न अवस्था मे भी,
गंधारी के सम्मुख जाता,
तो भी उसे मरना ही पड़ता,
तब कोई और उपाय करते कृष्ण,
क्योंकि,
जब सृजनकर्ता ही चाहता है की,
उसके, इस सृजन की मियाद खत्म हो गई है,
अब इसे नष्ट कर दिया जाये,
तो कौन रोकेगा?
मगर दुर्योधन को युद्धभूमि मे,
कराहते हुए अपनी मृत्यु की प्रतीक्षा करनी थी,
ताकि अश्वस्थामा अपनी पाशविक वृति का प्रदर्शन कर सके,
और फिर पांडवों को भी तो सिख देनी थी की,
युद्ध चाहे महाभारत जैसी धर्मयुद्ध ही क्यों ना हो,
किसी भी पक्ष की सम्पूर्ण विजय नहीं होती युद्ध में,
प्रेम सृजन का पथ है,
और दर्प विनाश का,
हम सब इस सच को जानते है,
परन्तु, त्याग, प्रेम और सदाचार का डगर कठिन है,
और अहं, आकांक्षाओं, और बदले की राह सहज और आसान है,
सब आसान को ही चुनते है,
जो मुश्किल राह चुनते है,
वही विजेता बनाते है पूर्ण विजेता,
बाकी सब तो उन्ही किरदारों को जीते है,
जिन्‍हे सकार करने को कहा गया है 

No comments:

Post a Comment

Write here