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Thursday, April 20, 2017

मेरी माँ

मेरी माँ
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तुम्हारा जाना,हमारे लिए सिर्फ माँ का दुनियाँ से चले जाना नहीं है,
तुम्हारा जाना,हमारी दुनियाँ को उजाड़ गया है माँ।
घनघोर अँधेरे के सम्राज्य में एक टिमटिमाते दीपक की तरह थी तुम,
तुम्हारे जाने के बाद वो टिमटिमाता दीपक भी हमसे छीन गया है माँ।
विपत्ति के दिनों में जब सारे घर में मरघट पसरा रहता है,
तब थोड़ा सा गुड़ और एक लोटा पानी पकड़ने वाली हाथ थी तुम,
तुम्हारे बिना इस मरघट पसरे घर में शुष्क गले प्यास से तड़पने को मजबूर हो गए माँ।
तुम्हारे जाने का दुःख बयां करना आसान नहीं,
आँखें रिक्त है आँसुओं से, शब्दों को जैसे लकवा मार गया है,
कि तुम्हारे बिना अपने दुःख-दर्द को बयां करने का तरीका भी हमसे रूठ गया माँ।
जी ऐसे रहे है, जैसे कोई फर्क नहीं पड़ा तुम्हारे जाने से,
कि शैतान की एक बस्ती है, जहाँ नाचना पड़ता है सबको जहर पीकर,
तुम्हारे बिना " हे राम यह घोर पाप है" ऐसे शब्दों के अमृत से महरूम हो गए है माँ। @मनोरंजन 

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