हम शर्मिंदा है
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अब ये आँसू बहा कर हम क्या करेंगे,
हमारे आँखों का नूर तो चला गया,
हाँ हमें गर्व है कि वो भारत माँ
के फटे हुए आँचल को ढ़ँकने के प्रयास में,
शहीद हो गया,
मगर इस गर्व का हम क्या करें,
हमारे जीवन का गरूर तो चला गया,
तिरंगे में लिपटी हुई लाश आयी है उसकी,
सलामी देकर उसके शहादत को
मान/सम्मान दे रहे है
देश के सिपाही
मगर मान/सम्मान का क्या करें हम,
हमारे मान/सम्मान का रक्षक,
वो हमारे जीवन का सुरूरतोचला गया,
आप रखो इन आँसुओं को बचा कर अपने पास,
अगले चुनाव में शायद कोई काम आ जाये,
ये गर्व का एहसास, ये मान/ सम्मान भी,
आप लेकर जाओ,
रख देना अपने "ड्राइंग रूम" में टांग कर,
लोगों को दिखने के काम आएगा,
हम शर्मिंदा है,
भारत माँ के फटे हुए आँचल को देख कर,
हमें शर्मिंदा ही रहने दो,
हमें शर्मिंदा ही रहने दो । @ मनोरंजन
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