वो हर काम,
जिसे छुपाने की जरुरत होती है,
अपराध कही जाती है,
सिवा एक प्रेम को छोड़ कर,
बिना छुपाए प्रेम,
अपने सम्पूर्णता को प्राप्त ही नहीं होता,
अफ़सोस नहीं है मुझे अपनी धृष्टता का,
तुम्हे छूने के लिए,
किस हद की चोरी कर जाता था,
आज भी मेरी अँगुलियों में तुम्हारी ख़ुश्बू,
वैसी की वैसी ही है,
अगर चोरी ना करता तो,
मेरे पास तुम्हारा कुछ नहीं बचता। @मनोरंजन
जिसे छुपाने की जरुरत होती है,
अपराध कही जाती है,
सिवा एक प्रेम को छोड़ कर,
बिना छुपाए प्रेम,
अपने सम्पूर्णता को प्राप्त ही नहीं होता,
अफ़सोस नहीं है मुझे अपनी धृष्टता का,
तुम्हे छूने के लिए,
किस हद की चोरी कर जाता था,
आज भी मेरी अँगुलियों में तुम्हारी ख़ुश्बू,
वैसी की वैसी ही है,
अगर चोरी ना करता तो,
मेरे पास तुम्हारा कुछ नहीं बचता। @मनोरंजन




