क्या नरेन्द्र मोदी भारत के छठे प्रधानमंत्री नहीं है?
----------------------------------------
कहने को तो अब भी कुछ थेथ्थर टाइप के लोग कह रहे है की " अच्छे दिन आ गए क्या" अब उन बक्लोलों को कौन समझाए की अच्छे दिन के मतलब हर भारतीय के बैंक खाते में 15 लाख रुपये डालना नहीं होता......पता नहीं कौन उजबुक ऐसी बेसिर-पैर की बातें करके सोचता है की भारत के लोग अब भी बेवकूफ है, हवा बना देने से हवा के साथ बह जायेंगे........ उन्हें कुछ दिखाई नहीं देगा क्या? ये उजबुक देश के जनता को बेवकूफ़ मानते-मानते 60-65 साल में खुद ही बकलोल बन गए है....... अगर सिर्फ हवा बनाने से सरकार बन सकती तो दिल्ली का मुख्यमंत्री कोई भाजपा का नहीं होता? और इतने बड़े उदहारण से भी नहीं सिख रहे ये बकलोल लोग....... स्वच्छता अभियान और योग दिवस जैसे पहल को भी टारगेट करने लगते है..... ये क्या कम है की देश एक ऐसे प्रधानमंत्री को देख रहा है, जो पुरे देश को अपना परिवार मनाता है, परिवार का मुखिया भी तो कई बार अपने परिवार के लोगों के सभी आकाँक्षाओं को पूरा नहीं कर पता और कई बार तो परिवार को बेहद मुश्किल से गुजरना पड़ता है तो क्या परिवार वाले अपने मुखिया को छोड़ देते है?
पहली बार हम एक ऐसे प्रधानमंत्री को देख रहे है, जो पहल करता है देशवासियों को कुछ अच्छा करने को प्रेरित करता है..... इससे पहले क्या आपने सुना है किसी प्रधानमंत्री को देशवाशियों को कुछ अच्छा करने को प्रेरित करते हुए? राजीव गाँधी और अटल बिहारी वाजपेयी के बीच के प्रधानमंत्रियों के तो नाम याद रखने को मसक्कत करने पड़ते है, खीज भी होती है, उन प्रधानमंत्रियों के बारे में हेरा-फेरी और तमाम अरुचिकर बातो के सिवा कुछ भी याद नहीं आता....... मेरे लिए तो मोदी, भारत के छठे प्रधान मंत्री है.... नेहरू जी, लालबहादुर शाष्त्री जी, इंदिरा जी, राजीव गाँधी जी, अटल बिहारी वाजपेयी जी और छठे नरेन्द्र मोदी जी।@ मनोरंजन
----------------------------------------
कहने को तो अब भी कुछ थेथ्थर टाइप के लोग कह रहे है की " अच्छे दिन आ गए क्या" अब उन बक्लोलों को कौन समझाए की अच्छे दिन के मतलब हर भारतीय के बैंक खाते में 15 लाख रुपये डालना नहीं होता......पता नहीं कौन उजबुक ऐसी बेसिर-पैर की बातें करके सोचता है की भारत के लोग अब भी बेवकूफ है, हवा बना देने से हवा के साथ बह जायेंगे........ उन्हें कुछ दिखाई नहीं देगा क्या? ये उजबुक देश के जनता को बेवकूफ़ मानते-मानते 60-65 साल में खुद ही बकलोल बन गए है....... अगर सिर्फ हवा बनाने से सरकार बन सकती तो दिल्ली का मुख्यमंत्री कोई भाजपा का नहीं होता? और इतने बड़े उदहारण से भी नहीं सिख रहे ये बकलोल लोग....... स्वच्छता अभियान और योग दिवस जैसे पहल को भी टारगेट करने लगते है..... ये क्या कम है की देश एक ऐसे प्रधानमंत्री को देख रहा है, जो पुरे देश को अपना परिवार मनाता है, परिवार का मुखिया भी तो कई बार अपने परिवार के लोगों के सभी आकाँक्षाओं को पूरा नहीं कर पता और कई बार तो परिवार को बेहद मुश्किल से गुजरना पड़ता है तो क्या परिवार वाले अपने मुखिया को छोड़ देते है?
पहली बार हम एक ऐसे प्रधानमंत्री को देख रहे है, जो पहल करता है देशवासियों को कुछ अच्छा करने को प्रेरित करता है..... इससे पहले क्या आपने सुना है किसी प्रधानमंत्री को देशवाशियों को कुछ अच्छा करने को प्रेरित करते हुए? राजीव गाँधी और अटल बिहारी वाजपेयी के बीच के प्रधानमंत्रियों के तो नाम याद रखने को मसक्कत करने पड़ते है, खीज भी होती है, उन प्रधानमंत्रियों के बारे में हेरा-फेरी और तमाम अरुचिकर बातो के सिवा कुछ भी याद नहीं आता....... मेरे लिए तो मोदी, भारत के छठे प्रधान मंत्री है.... नेहरू जी, लालबहादुर शाष्त्री जी, इंदिरा जी, राजीव गाँधी जी, अटल बिहारी वाजपेयी जी और छठे नरेन्द्र मोदी जी।@ मनोरंजन
No comments:
Post a Comment
Write here