नेपाल में भुकंप
-------------------
अभी जिंदगी आँख मिच रही थी,
नींद से जाग कर,
देख रही थी मुस्कुरा कर,
अँगड़ाइयाँ लेते सुबह को,
अभी उमंग उठे थे दिल में,
नए सूर्य के साथ आगे बढ़ने को,
जीने को एक नया सवेरा,
चल पड़े थे पाँव उठ कर,
अभी-अभी निकले थे कुछ नन्हे पाँव,
नया कुछ रचने को,
चल पड़े थे मज़बूत कदम,
अर्जन कुछ करने को,
अभी-अभी देखा था माँओं ने,
अपने नैनिहालों को हुलस कर,
किसे पता था,
की काल रच चुका था अपना खेल,
माँ धरती के आँचल में होने लगा था हलचल,
पल भर में ही जिंदगी,
बदल गई थी चीख़, हाहाकारों में,
हाय ये कैसी विडम्बना,
धरणी ही बन गई हन्ता,
माँ तुम ये कभी न करना,
ऐसा विकट रूप कभी न धरना। @ मनोरंजन
-------------------
अभी जिंदगी आँख मिच रही थी,
नींद से जाग कर,
देख रही थी मुस्कुरा कर,
अँगड़ाइयाँ लेते सुबह को,
अभी उमंग उठे थे दिल में,
नए सूर्य के साथ आगे बढ़ने को,
जीने को एक नया सवेरा,
चल पड़े थे पाँव उठ कर,
अभी-अभी निकले थे कुछ नन्हे पाँव,
नया कुछ रचने को,
चल पड़े थे मज़बूत कदम,
अर्जन कुछ करने को,
अभी-अभी देखा था माँओं ने,
अपने नैनिहालों को हुलस कर,
किसे पता था,
की काल रच चुका था अपना खेल,
माँ धरती के आँचल में होने लगा था हलचल,
पल भर में ही जिंदगी,
बदल गई थी चीख़, हाहाकारों में,
हाय ये कैसी विडम्बना,
धरणी ही बन गई हन्ता,
माँ तुम ये कभी न करना,
ऐसा विकट रूप कभी न धरना। @ मनोरंजन

No comments:
Post a Comment
Write here