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Wednesday, June 3, 2015

फर्क

प्यार होने और प्यार नहीं होने में बहुत फर्क होता है परी ,
जब हमें किसी से सच्चा प्यार होता है तो,
उसकी हर बात अच्छी लगती  है,
हर माँग  जायज़  लगती  है,
उसके साथ रहना और जीना  बेहद आसान होता है,
क्योंकि उसके साथ  होने मात्र से बाकी  सब कमियों का एहसास नहीं होता,
बाकी  सब दुर्बलताएँ और असफलताएँ गौण हो जाती है,
और इसतरह जीवन हर्ष,उल्लास,और उत्साह से भर कर सफलता की ओर अग्रसर हो जाती है,
पर,
जब हमें किसी से प्यार नहीं होता,
और हमें साथ जीवन जीना  होता है तो,
जीवन अनेक कठिनाइयों से भर जाती है,
भले ही वह निर्दोष हो, मासूम हो और चारित्रिक गुणों से भी भरपूर हो,
मगर हमें हर बात-बात में कुछ खोट नज़र आती है,
उसकी हर बात नापसंद सी होने लगती  है,
उसकी हर माँग गलत लगाने लगती है,
और सबसे बड़ी बात,
जीवन सिर्फ एक इसी बिंदु के इर्द-गिर्द घूमने लगती है की,
कैसे परस्पारिकता स्थापित करें,
कैसे सब अच्छा हो जाए ,
क्या करें की ख़ुशी  उल्लास का माहौल बने,
और हम चाहे कितने भी बुद्धिमान और समझदार शख़्स क्यों न हो,
बात बिगङते चली जाती है,
और अंततः जीवन खीझ, चिड़चिड़ापन,गुस्सा और क्षोभ के भेंट चढ़ जाती है। @मनोरंजन   

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