मर्यादाहीन आचरण करने वाले नेता जिन्हें कई पार्टियों ने इनाम दिया अब मर्यादा टूटने का रोना रो रहे है.........देखें एक नज़र
भारत सरकार के गृहमंत्री सिख दंगों पर हो रही जाँच के सम्बन्ध में अपनी सरकार की सफाई पेश कर रहे है, तभी एक पँजाबी युवक उठता है और उन पर अपना जूता दे मारता है, आप उस पँजाबी युवक (जरनैल सिंह) को लोकसभा का टिकट देते हो, हार जाता है, फिर विधानसभा के टिकट पर जीत कर दिल्ली प्रदेश का विधायक और एक तथाकथित सबसे स्वच्छ/सबसे ईमानदार पार्टी के सबसे बड़े नेताओं में जगह पा जाता है। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में कविता पाठ के आयोजन के नाम पर छात्रों को इकठ्ठा किया जाता है, और वहाँ देश के सुप्रिमकोर्ट जिन आतंकवादियों को मौत की सज़ा सुना चुकी है /राष्ट्रपति उस फैसले पर अपना हस्ताक्षर कर चुके है, ऐसे आतंकवादियों की जयकार करते हो, "कश्मीर जब तक आज़ाद नहीं हो जाता, हमारा संघर्ष जारी रहेगा" "भारत जब तक बर्बाद नहीं हो जाता, हमारा संघर्ष जारी रहेगा" जैसे नारे लगाते हो, और प्रशासन जब आपको अरेस्ट करती है तो आपको दिल्ली से लेकर बिहार तक हीरो बना दिया जाता है, आपके "राष्ट्रनिर्माण" सम्बन्धी अमूल्य/अतुल्य विचारों को सुनने के लिए हजारों युवकों को इकठ्ठा किया जाता है। आपके इस सफलता को देखते हुए कौन अध्ययनरत युवा नहीं सोचता होगा कि यार कलम घिस-घिस कर क्या करना है/ IAS /IPS बन कर क्या करना है जब सिर्फ कुछ उत्तेजक/उग्र/ मर्यादाहीन आचरण करके हम उस जगह पहुँच सकते है जहाँ IAS /IPS हाँथ में फ़ाइल लेकर खड़े रहते है ( उत्तरप्रदेश के पूर्वमुख्यमंत्री मायावती का कथन) तो इतना परिश्रम करके पढने की क्या जरुरत है? लोकसभा चुनाव (2014 ) के दौरान एक शख़्स,(इमरान मसूद) एक पार्टी के प्रधानमंत्री पद के प्रत्यासी का सर कलम करने को कहता है, और सिर्फ इसी एक वक्तव्य से वह अपनी पार्टी के प्रदेश इकाई के सबसे बड़े नेताओं में सुमार हो जाता है, कौन नेता नहीं चाहेगा कि ऐसे ही वक्तव्य देकर वह रातों-रात राजनीति के शिखर पर पहुँच जाए ? एक बाइस साल का युवक( जिसने आरक्षण के वजह से सामान्य कोटे के छात्रों को होने वाली पीड़ा का एहसास भी नहीं हुआ होगा ) वह गुजरात जैसे प्रदेश में पटेल समुदाय के आरक्षण का मुद्दा उठता है, और देखते ही देखते लाखों लोग उसके पीछे खड़े हो जाते है, और उसे देश के हर कोने से राजनीति के धुरंधर अपने गोद में बैठाने/ सर-आँखों पर बैठाने को लालायित हो जाते है, देश के आम युवक क्या सोच रहा होगा? जब सिर्फ कुछ उत्तेजक/उग्र/ मर्यादाहीन आचरण करके हम उस जगह पहुँच सकते है जहाँ IAS /IPS हाँथ में फ़ाइल लेकर खड़े रहते है तो क्यों पढना है? क्यों अपनी आधी उम्र पढ़ाई में व्यर्थ करना है? ऐसे ना जाने कितने उदहारण है, योगी आदित्यनाथ, संगीत सोम, साक्षी महाराज, अरविन्द केजरीवाल के पार्टी का हर नेता इसी शॉर्टकट का प्रयोग करके देश के करोड़ों लोगों के नुमाइंदी करते है फिर मर्यादा क्यों?
आज हर कोई जल्दी में है, किसी के पास इतना धैर्य नहीं है कि चालीस-पचास सालों(अटल-आडवाणी की तरह) तक अपने क्षेत्र के लोगों का प्रतिनिधित्व करो, संसद में मर्यादा का पालन करो, लोगों के नज़रों में एक स्वच्छ छवि बनाओं, इतना समय नहीं है। जो करना है, अभी करना है, किसी भी कीमत पर करना है। आप मर्यादा की बात करते हो? आप संसद के नाम पर इसे गाली कहते हो और पीछे जो-जो घटनाएँ हुई, जिसे महिमामंडित किया गया/इनाम दिया गया और इस तरह इस ओच्छी राजनीति की परिपाटी शुरू हुई, उसे भूल जाते हो? क्यों भूल जाते हो?
अब तो वक्त वही आ गया है कि आप इतना जोर से बोलो कि बाकी सबकी आवाज दब जाए, सिर्फ तुम्हारी आवाज सुनाई दे, तब ही आप सफल हो सकते हो।
और सच पुछो तो इस मर्यादा/अमर्यादा से राजनीति के "धंधे" से जुड़े किसी नेता को कोई तकलीफ़ नहीं है, सब अपनी-अपनी बारी के इंतेज़ार में, जब जिसको मौका मिलता है मर्यादा तोड़ देता है।
ये सब तो हम करोड़ों ज़ाहिल लोगों के भावनाओं से खेलने के लिए प्रोपेगेंडा किया जाता है कि देखो उसने "मर्यादा" तोडा तुम करोड़ों लोग थूको उस पर ताकि हम शासन में आकर "मर्यादा" तोड़ सके। तो अपने को भी अब ज्यादा टेंसन नहीं लेना है, मदाड़ी का खेल चल रहा है, मज़ा लो ,आनंद उठाओ @ मनोरंजन कुमार तिवारी
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