शर्मिला
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शर्मिला नाम है उसका,
पिछले पाँच साल से ब्याहता है,
पर अपने पति के पास नहीं गई अभी तक,
माँ, इस दुनियां से विदा ले चुकी है,
पिता बावले,
अपने रहमदिल मगर सीधे-साधे,
चाचा के पास रहती है दिल्ली में,
चाची उसकी बहुत चंट है,
कहती है,
जब तक लड़का नौकरी नहीं पकड़ लेगा,
विदा नहीं करेगी शर्मीला को,
घर में एक बेसिक फोन लगा है,
मौका पाकर कभी-कभी,
अपने पति से बात कर लेती होगी शर्मिला,
आज बात करते हुए मैंने सुन लिया,
शर्मिला के चेहरे पर शर्म नहीं खौफ के निशां थे,
सहमते हुए सिर्फ इतना ही कह सकी,
भैया, चाची को मत बताना,
आज पहली बार ही फोन किया था मैंने। @ मनोरंजन
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शर्मिला नाम है उसका,
पिछले पाँच साल से ब्याहता है,
पर अपने पति के पास नहीं गई अभी तक,
माँ, इस दुनियां से विदा ले चुकी है,
पिता बावले,
अपने रहमदिल मगर सीधे-साधे,
चाचा के पास रहती है दिल्ली में,
चाची उसकी बहुत चंट है,
कहती है,
जब तक लड़का नौकरी नहीं पकड़ लेगा,
विदा नहीं करेगी शर्मीला को,
घर में एक बेसिक फोन लगा है,
मौका पाकर कभी-कभी,
अपने पति से बात कर लेती होगी शर्मिला,
आज बात करते हुए मैंने सुन लिया,
शर्मिला के चेहरे पर शर्म नहीं खौफ के निशां थे,
सहमते हुए सिर्फ इतना ही कह सकी,
भैया, चाची को मत बताना,
आज पहली बार ही फोन किया था मैंने। @ मनोरंजन
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