1.
चेहरे पर कहाँ लिखी होती है,
सफ़ेद लोगों के साज़िशों की बद्ख्यालियाँ,
चेहरे पर तो बदनशिबों के,
अँधेरे जीवन की लकीरें खिंची होती है।@मनोरंजन
2.
तुम समझो ना,
उनकी भी बेबसी,
जो बातों में मिश्री घोल कर,
तुम्हारे बर्बादी की साज़िश करते है।@मनोरंजन
3.
एक चिड़िया है,
एक बच्चा है,
बच्चे के हाथ में एक धागा है,
उस धागे का दूसरा सिरा चिड़िया के पैरों में बाँधा है,
चिड़िया फुदकती है तो,
बच्चा हँसता है, ताली बजाता है,
चिड़िया अब फुदकना बंद कर शांत हो गई है,
बच्चा बेज़ार होकर रो रहा है।@ मनोरंजन
4.
जिन्दगी के टुकड़े बहुत दूर-दूर पर पड़े है भाई.......
समेटने-सहेजने और संवारने में तो मुश्किल होगा ही।@मनोरंजन
5.
क्या हुआ था, क्यों हुआ था,
कुछ याद नहीं रहता है,
जब सोचता हूँ,
तुम्हारे साथ अपने आखिरी मुलाकात के लम्हे।@मनोरंजन
6.
दिन भर चलने के बाद सायं को कहीं ना पहुँचाने का दर्द तुम नहीं समझ सकते बाबु......
तुम्हे दूसरों के कंधे पर बैठ चलने की आदत जो हो गई है।@ मनोरंजन
7.
बाबा रे......जीस आदमी को कुछ भी नहीं करना होता है, उसकी थिंकिंग एबिलिटी कितनी बढ़ जाती है.......वह एक साथ कई बातों को सोच लेता है, कितने आइडिया आते है ऐसे लोगों के दिमाग में।@ मनोरंजन
8.
शैतानों के भीड़ में कहीं भगवन भी होते है,
पढ़ लेते है चेहरे का दर्द और
उन आसुंओं से भीग जाते है,
जो आँखों में ही कहीं सूख जाते है,
बढ़ा देते है अपना हाथ थामने को उसे,
जो बस बदहवास हो गीरने को होता है,
हाँ, भगवान है
यहीं कहीं हमारे बीच ही रहते है।@ मनोरंजन
चेहरे पर कहाँ लिखी होती है,
सफ़ेद लोगों के साज़िशों की बद्ख्यालियाँ,
चेहरे पर तो बदनशिबों के,
अँधेरे जीवन की लकीरें खिंची होती है।@मनोरंजन
2.
तुम समझो ना,
उनकी भी बेबसी,
जो बातों में मिश्री घोल कर,
तुम्हारे बर्बादी की साज़िश करते है।@मनोरंजन
3.
एक चिड़िया है,
एक बच्चा है,
बच्चे के हाथ में एक धागा है,
उस धागे का दूसरा सिरा चिड़िया के पैरों में बाँधा है,
चिड़िया फुदकती है तो,
बच्चा हँसता है, ताली बजाता है,
चिड़िया अब फुदकना बंद कर शांत हो गई है,
बच्चा बेज़ार होकर रो रहा है।@ मनोरंजन
4.
जिन्दगी के टुकड़े बहुत दूर-दूर पर पड़े है भाई.......
समेटने-सहेजने और संवारने में तो मुश्किल होगा ही।@मनोरंजन
5.
क्या हुआ था, क्यों हुआ था,
कुछ याद नहीं रहता है,
जब सोचता हूँ,
तुम्हारे साथ अपने आखिरी मुलाकात के लम्हे।@मनोरंजन
6.
दिन भर चलने के बाद सायं को कहीं ना पहुँचाने का दर्द तुम नहीं समझ सकते बाबु......
तुम्हे दूसरों के कंधे पर बैठ चलने की आदत जो हो गई है।@ मनोरंजन
7.
बाबा रे......जीस आदमी को कुछ भी नहीं करना होता है, उसकी थिंकिंग एबिलिटी कितनी बढ़ जाती है.......वह एक साथ कई बातों को सोच लेता है, कितने आइडिया आते है ऐसे लोगों के दिमाग में।@ मनोरंजन
8.
शैतानों के भीड़ में कहीं भगवन भी होते है,
पढ़ लेते है चेहरे का दर्द और
उन आसुंओं से भीग जाते है,
जो आँखों में ही कहीं सूख जाते है,
बढ़ा देते है अपना हाथ थामने को उसे,
जो बस बदहवास हो गीरने को होता है,
हाँ, भगवान है
यहीं कहीं हमारे बीच ही रहते है।@ मनोरंजन
वाह...
ReplyDeleteबेहतरीन क्षणिकाएँ
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सादर