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Tuesday, January 12, 2016

भारतीय जनतंत्र

भारतीय जनतंत्र,
क्या मदाड़ियों के डमरू के आवाज़ पर करतब दिखता बंदर बन कर रह जायेगा?
सँपेरा (साँपों के विषदंत निकाल कर अपराधिक कृत्य करने वाला) हमें इसतरह प्रभावित करता रहेगा और हम मुग्ध होकर,तमाशबीन बन कर कब तक देखते रहेंगे?
ये तरह-तरह के खेल दिखा कर आम जनों को मुग्ध करने वालों का दौर क्या कभी नहीं थमेगा?
हम कब इन करतबों से हट कर अपने बेहतरी के बारे में सोचेंगे?
ना, ऐसा मत कहो की फर्क नहीं पड़ता,
बहुत फर्क पड़ता है सरकारों के द्वारा आम जन के जीवन को बहुत प्रभावित किया जाता है। @मनोरंजन

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