कविता सी कुछ ---------
यह मेरे किताब की रफ़ पण्डुलिपि है
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Tuesday, January 12, 2016
क्षणिकाएँ
लंगड़ा घोडा और गदहा, दूलाती जरूर मरता है और आस-पास में कुछ और लंगड़े घोड़े और गदहे हों तो आवाज आती है.....क्रन्तिकारी....बहुत क्रन्तिकारी प्रयास है।@मनोरंजन
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