माँ के चले जाने के बाद......
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रोया नहीं एक बार भी,
एक बूँद भी आँसू बहा नहीं,
माँ के चले जाने के बाद,
माँ ने बहा दिए होंगे मेरे हिस्से के सारे आँसू,
पर अब माँ नहीं है, मैं हूँ यहीं,
और वैसा ही हूँ, जैसा पहले था,
हिसाब-किताब का कच्चा, बचत और भविष्य से लापरवाह,
भावुक, कमजोर और संवेदनशील,
और ये दुनिया भी वैसी ही है, जैसी पहले थी,
निष्ठुर, स्वार्थी और संवेदनहीन,
इससे अब निपटना होगा मुझे खुद ही,
जनता हूँ कटना पड़ेगा मुझे कदम-कदम पर,
लहू -लुहान होते रहेगा मेरा जमीर,
क्योंकि मेरा ढाल बनने वाला अब कोई ना होगा,
मेरी हर कमज़ोरी को अपने आँसुओं से ताकतवर,
बना देने वाला कोई नहीं होगा,
घर, परिवार और दुनियादारी,
नाते-रिश्ते और पट्टीदारी,
एक-दूसरे से ऊँचा और बेहतर कहलाने की होड,
और इस होड़ में अकेला पड़ते मुझे,
"तू इतना मत सोच बेटा"
कहने वाला कोई नहीं होगा,
सब इस होड़ में घसीटेंगे मुझे,
रोना तो पड़ेगा ही मुझे आज नहीं तो कल,
क्योंकी मन की वो सारी बातें जो मैं कह नहीं पाता,
उसे जानने वाला और उसे कह कर,
इस होड़ से मुझे साफ़ बचा कर,
मुझे सबसे ऊपर कर देने वाला अब कोई नहीं होगा। @मनोरंजन
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रोया नहीं एक बार भी,
एक बूँद भी आँसू बहा नहीं,
माँ के चले जाने के बाद,
माँ ने बहा दिए होंगे मेरे हिस्से के सारे आँसू,
पर अब माँ नहीं है, मैं हूँ यहीं,
और वैसा ही हूँ, जैसा पहले था,
हिसाब-किताब का कच्चा, बचत और भविष्य से लापरवाह,
भावुक, कमजोर और संवेदनशील,
और ये दुनिया भी वैसी ही है, जैसी पहले थी,
निष्ठुर, स्वार्थी और संवेदनहीन,
इससे अब निपटना होगा मुझे खुद ही,
जनता हूँ कटना पड़ेगा मुझे कदम-कदम पर,
लहू -लुहान होते रहेगा मेरा जमीर,
क्योंकि मेरा ढाल बनने वाला अब कोई ना होगा,
मेरी हर कमज़ोरी को अपने आँसुओं से ताकतवर,
बना देने वाला कोई नहीं होगा,
घर, परिवार और दुनियादारी,
नाते-रिश्ते और पट्टीदारी,
एक-दूसरे से ऊँचा और बेहतर कहलाने की होड,
और इस होड़ में अकेला पड़ते मुझे,
"तू इतना मत सोच बेटा"
कहने वाला कोई नहीं होगा,
सब इस होड़ में घसीटेंगे मुझे,
रोना तो पड़ेगा ही मुझे आज नहीं तो कल,
क्योंकी मन की वो सारी बातें जो मैं कह नहीं पाता,
उसे जानने वाला और उसे कह कर,
इस होड़ से मुझे साफ़ बचा कर,
मुझे सबसे ऊपर कर देने वाला अब कोई नहीं होगा। @मनोरंजन

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