तुम तक जाती कोई राह बची हो तो,
मेरा रब, मुझे वह राह दिखाए,
नफरतों से अकड़ गया हूँ सूखे, बेज़ान शाखों की तरह,
मेरी जड़ों में, तुम्हारे प्रेम की नमी भर जाए,
मेरा रब, मुझे तुम तक पहुँचने की कोई तरक़ीब बताए। @मनोरंजन
मेरा रब, मुझे वह राह दिखाए,
नफरतों से अकड़ गया हूँ सूखे, बेज़ान शाखों की तरह,
मेरी जड़ों में, तुम्हारे प्रेम की नमी भर जाए,
मेरा रब, मुझे तुम तक पहुँचने की कोई तरक़ीब बताए। @मनोरंजन
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