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Tuesday, January 12, 2016

प्रार्थना सर्वशक्तिमान से

सर्वज्ञ/सर्वव्यापी /सर्वशक्तिमान-------
अगर आप हो वाकई तो,
देखो नीचे/ अपनी रचनाओं को,
अपने सृजन को देखो गौर से,
आपने पेड़-पौधों का सृजन किया,
धरती का/ आकाश का सृजन किया,
हवा/पानी/प्राकृतिक सम्पदा/सौंदर्य
जीव-जन्तु /जानवर/पक्षी
नदियाँ/ सागर/ग्रह/उपग्रह/तारें
सब खुबसूरत/हसीन/जहीन बनाया आपने,
और अपना सबसे नयाब सृजन जिसे समझते होंगे आप,
वो इंसान भी गढ़ा आपने,
पर आपका ये नयाब सृजन ही दोषपूर्ण है,
दोषपूर्ण?
मैं तो कहता हूँ पुरी की पुरी आफत ही बना दी है आपने,
कितना सब भर दिया है आपने इस छोटी सी रचना में,
प्रेम भरा और दर्द भी/ इर्ष्या/ द्वेष/नफ़रत/और पछतावा भी
मिलना, संग जीना और फिर बिछड़ना भी,
क्या आपको उस दर्द का अंदाजा होगा?
जिस दर्द को सालों तक साथ जीने वाले लोग,
बिछड़ने के बाद सहते है,
नहीं आपने जरूर गलती की है,
और जो गौर से देखेंगे तो,
निश्चय ही खुश नहीं होंगे आप अपने नयाब सृजन से,
आपके नायब सृजन में इतना बड़ा दोष होगा,
इसका अंदाजा शायद आपको भी नहीं होगा,
काश आपने हमें भी पेड़-पौधों की तरह ही बनाया होता,
या जीव/जंतुओं/पशुओं की तरह ही बनाया होता,
ये प्रेम/स्नेह/करुणा/ममता
ना मिलती, ना सही,
पर ये दर्द...... ये दर्द बहुत असह्य है प्रभु। @ मनोरंजन

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