एक लब्ज़ विदा लिखन
==============
रूमानियत हो, तख़्ती भी,
जो दिल में जगा दे भक्ति भी,
जीने की कला सिखलाए जो,
चेहरा बन कर मुस्कुराये जो,
ऐसी कोई शब्द मुझे लिख दो,
जिसमें हो पीड़ा की अभिव्यक्ति भी,
एक लब्ज़ विदा लिखना,
दुखदायी है, नाम तेरा, ख़ुद से ही जुदा लिखना,
कोई चाह नहीं मुझको तुमसे,
कोई दाह नहीं मुझको तुमसे,
मन खिन्न हो जाता है सबसे,
तब चीख उठती है दिल से,
कहना चाहता हूँ, कुछ तुमसे,
एक गीत भेजो, मेरी खातीर,
जिस गीत के बोल में तुम हो बसी,
जिसमें हो तुमसे विरक्ति भी,
एक लब्ज़ विदा लिखना,
दुखदायी है नाम तेरा,
ख़ुद से ही ज़ुदा लिखना............मनोरंजन
No comments:
Post a Comment
Write here