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Wednesday, April 16, 2014

अंकुर
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अगर लगानी है,
एक सुंदर बाग मन- मन्दिर में,
एक बार तो आग लगानी होगी,
जल जाने देना होगा, सारे खर-पतवार, जंगली पौधो को,
मीट जाने देना होगा खाक में,
सारे झाड- झंझाड, और परजीवी, जहरीली  घांसो को,
जो अवरूद्ध कर देते है,
फूलों को विकसित होने से,
नया फूटते अंकुर को दाब देते है,
वंचित कर देते है, पोषक तत्वों से,
हवा, पानी, सब धूप, हड़प खुद लेते है,
एक बार तो दृढ़ता और सख़्ती की हल चलानी होगी,
अगर सजानी है,
एक सुन्दर बागवां मन-मंदिर मे,
एक बार तो आग लगानी ही होगी,
भिगोना होगा आँसुओ की धारा से,
बंजर पड़ी ज़मीं को,
गल जाने देना होगा,
शेष बचे सूखी जड़ों को,
मिट्टी की उर्वरता की शक्ति तभी बढ़ेगी,
नये अंकुर फूटेंगे तभी,
मुस्कुराएँगे सब,
शिशु पौधे जीवन के नव उमंग से,
महकेंगे फूल बाग़ मे,
सुंदर बगीया तभी सजेगी.
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मनोरंजन



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