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Tuesday, January 12, 2016

देश की व्यथा

काम करो प्रधानमंत्री जी,
जो जमीं पर दिखने लगे,
हवा में उड़ते बोल से कोई फायदा नहीं,
मीडिया में, टीवी पर चाहे कितना भी कह लो,
भारत की साठ प्रतिशत आबादी आज भी,
अपने घर में पकने वाले या ना पकने वाले खाना को ही देखती है,
काम करो प्रधानमंत्री जी,
जो इन साठ प्रतिशत से भी ज्यादा भारतवंसियों के,
आँगन में दिखे, रसोई में दिखे, चूल्हें पर दिखे,
काम करो प्रधानमंत्री जी,
सम्राज्य स्थापित करने को उतावली में,
देश की आत्मा को मत भूलो,
यहाँ सम्राज्य स्थापित उसी ने किया है,
जो लोगों के दिलों में उतर जाता है,
दिमाग में कुछ भी भर देने से कुछ नहीं होगा,
काम करो प्रधानमन्त्री जी,
ऐसा की मौकापरस्तों के मुँह बंद हो जाये,
अपने जोकरों के जुमलों पर रोक लगाओ प्रधानमंत्री जी,
ऐसी बातों से भारत के नब्बे प्रतिशत से भी ज्यादा लोग,
इत्तेफ़ाक नहीं रखते,
काम करो प्रधानमंत्री जी,
जो चन्दन की खुशबू सी महके,
हम तो आपको ही पसंद करते है,
आपके तरफ ही आशा, उम्मीद और विश्वास से देखते है,
आज जो जीता है,
वह चन्दन(नितीश) है,
क्या फर्क पड़ता है की
उससे कितने सांपनाथ और नागनाथ लिपटे है,
उसने अपनी खुशबू जमीं पर, फिजाओं में बिखेरी है,
हम उनसे ज्यादा आशा भी नहीं कर रहे,
हम तो आपसे आशा करते है की,
काम करो प्रधानमंत्री जी,
जिससे आप चन्दन बन जाओ और,
आपकी खुशबू देश के फिजाओं में महके,
जमीं पर दिखे,
फिर आपसे भुजंग भी लिपटे रहे तो हमें परवाह नहीं होगा,
हम आपके समर्थक है,
इसलिए कहते है,
काम करो प्रधानमंत्री जी।@मनोरंजन

2 comments:

  1. शुभ प्रभात....
    आप आए मेरा धरोहर में
    आपका आभार...
    सादर...

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  2. धन्यवाद जशोदा अग्रवाल जी
    मैं काफी समय से इंटरनेट पर सक्रिय नहीं था,
    बहुत काम करने को है, अपना स्नेह और मार्गदर्शन देते रहें,
    मैंने देखा धरोहर में मेरी कविता " चरित्रहीन"
    मुझे बहुत ख़ुशी हुई, आपका तहे दिल से शुक्रिया

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