दिल्ली मेट्रो में
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एक दिन देखा दिल्ली मेट्रो में अद्भुत नजारा,
एक प्लेटफार्म पर,
एक बहुत ही खूबसूरत और प्यारी सी लड़की,
झुकी हुई थी घुटनों पर,
हाथों में फूलों का गुलदस्ता लिये,
पहली बार ही देखा ऐसा,
जब कोई लड़की अपने प्यार का,
इज़हार कर रही हो इसतरह,
उसके चेहरे की मासूमियत और खुशी,
मेरे अंतस तक को दग्ध किये जा रही थी,
कभी फिल्मों में भी नहीं देखा था ऐसा,
कई दिनों तक सोचते रहा,
और मुस्कुराते रहा,
उस लड़की की मासूमियत और खुशी,
जैसे मेरे मन के भीतर तक पैवस्त हो गई थी,
की अचानक एक रोज,
उसी लड़की को देखा,
प्लेटफार्म के एक कोने में खड़ी आँसू बहा रही थी,
और वही लड़का,
अपनी पूरी कोशिशों में लगा था कुछ समझने में।
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एक दिन देखा दिल्ली मेट्रो में अद्भुत नजारा,
एक प्लेटफार्म पर,
एक बहुत ही खूबसूरत और प्यारी सी लड़की,
झुकी हुई थी घुटनों पर,
हाथों में फूलों का गुलदस्ता लिये,
पहली बार ही देखा ऐसा,
जब कोई लड़की अपने प्यार का,
इज़हार कर रही हो इसतरह,
उसके चेहरे की मासूमियत और खुशी,
मेरे अंतस तक को दग्ध किये जा रही थी,
कभी फिल्मों में भी नहीं देखा था ऐसा,
कई दिनों तक सोचते रहा,
और मुस्कुराते रहा,
उस लड़की की मासूमियत और खुशी,
जैसे मेरे मन के भीतर तक पैवस्त हो गई थी,
की अचानक एक रोज,
उसी लड़की को देखा,
प्लेटफार्म के एक कोने में खड़ी आँसू बहा रही थी,
और वही लड़का,
अपनी पूरी कोशिशों में लगा था कुछ समझने में।
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