जीवन पथ
............... एक कविता अंश
.................................
कब रात चढ़ी, रात ढली, सुबह हुआ,
कब तपती हुई धूप में कदम ये बढ़ा,
कब तक थक गई सांसे, धड़कन,
मुझको आभास ना हुआ,
मेरी ज़िंदगी का वो कोमल सवेरा है कहाँ,
जिसका मुझको कभी एहसास ना हुआ।@मनोरंजन
............... एक कविता अंश
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कब रात चढ़ी, रात ढली, सुबह हुआ,
कब तपती हुई धूप में कदम ये बढ़ा,
कब तक थक गई सांसे, धड़कन,
मुझको आभास ना हुआ,
मेरी ज़िंदगी का वो कोमल सवेरा है कहाँ,
जिसका मुझको कभी एहसास ना हुआ।@मनोरंजन
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