Followers

Thursday, November 13, 2014

जीवन पथ 
............... एक कविता अंश
................................. 
कब रात चढ़ी, रात ढली, सुबह हुआ,
कब तपती हुई धूप में कदम ये बढ़ा,
कब तक थक गई सांसे, धड़कन,
मुझको आभास ना हुआ,
मेरी ज़िंदगी का वो कोमल सवेरा है कहाँ,
जिसका मुझको कभी एहसास ना हुआ।@मनोरंजन

No comments:

Post a Comment

Write here