अब चिंता नहीं चिंतन करना होगा
.........................................
बहुत पानी बह चुका है,
अब प्रवाह रोकना होगा,
सूख जायेगी स्नेह, सहभागिता की सरिता,
बन चुके अनन्त छिद्रों को भरना होगा,
जीवन ये अनमोल तुम्हारा,
अब इसे संवारना होगा ,
अब भूत का पश्चताप नहीं, परिपक्व प्रयास करना होगा,
अब दुख, तकलीफ और अपमानों से मर्माहत ना हो,
अब गंभीर मंथन करना होगा,
दुनिया गलत हो सकती नहीं,
अब नज़र नहीं नजरिया बदलना होगा,
अब फिक्र नहीं, फक्र करो खूद पर,
अब चिंता नहीं, चिंतन करना होगा।@मनोरंजन
.........................................
बहुत पानी बह चुका है,
अब प्रवाह रोकना होगा,
सूख जायेगी स्नेह, सहभागिता की सरिता,
बन चुके अनन्त छिद्रों को भरना होगा,
जीवन ये अनमोल तुम्हारा,
अब इसे संवारना होगा ,
अब भूत का पश्चताप नहीं, परिपक्व प्रयास करना होगा,
अब दुख, तकलीफ और अपमानों से मर्माहत ना हो,
अब गंभीर मंथन करना होगा,
दुनिया गलत हो सकती नहीं,
अब नज़र नहीं नजरिया बदलना होगा,
अब फिक्र नहीं, फक्र करो खूद पर,
अब चिंता नहीं, चिंतन करना होगा।@मनोरंजन
No comments:
Post a Comment
Write here