कविता सी कुछ ---------
यह मेरे किताब की रफ़ पण्डुलिपि है
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Friday, November 21, 2014
उसके एहसास से भरा रहता हूँ इसकदर,
की और कुछ भी एहसास नहीं होता,
आँखों के सामने से गुज़र जाता है समंदर,
पर होठों पर एक बूंद के लिये भी प्यास नहीं होता।@ मनोरंजन
1 comment:
सुनीता अग्रवाल "नेह"
November 21, 2014 at 6:11 AM
उम्दा
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उम्दा
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