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Friday, September 12, 2014

इश्क
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मिला नहीं कोई अभी तक,
जिससे इश्क करूँ मैं चोरी चोरी,
मिलूँ उससे छुप-छुप कर,
छुप-छुप कर ही मुस्काऊँ,
बातें करने को उससे,
तरस-तरस सा जाऊँ,
बात कर भी ले वो मुझसे तो,
ज़ुबां से बातें निकले कोरी-कोरी,
मिला नहीं कोई अभी तक,
जिससे इश्क करूँ मैं चोरी-चोरी।
सोचूँ उसको, उसकी बातें,
कट जाये आँखों में रातें,
तन-मन में एक मदहोशी हो,
जीवन में एक गर्मजोशी हो,
रोज मिले, कुछ रोज कहें,
कुछ कहने को बाकी भी रहे,
कोई नाज़ुक अंग छू जाये उसका,
भक्क चेहरा लाल हो जाये,
मैं दूर खड़ा डरा-सहमा,
वो धीरे से मुस्काये,
आँखों में अनन्त आकाश हो,
और वो हरकदम मेरे पास हो,
हर रोज हो प्यार थोरी-थोरी,
मिला नहीं अभी तक कोई,
जिससे इश्क करूँ मैं चोरी-चोरी।............................मनोरंजन
 http://manoranjan234.blogspot.in/

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