कविता सी कुछ ---------
यह मेरे किताब की रफ़ पण्डुलिपि है
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Friday, September 19, 2014
खो गये सब कुछ,
चकाचौंध में खो गये,
चूल्हे से उठता धुँआ,
धुँए की बनती वो छाई,
धुएँ से जलती आँख पोछती,
ममतामयी परछाई,
अनजाने में जाने कैसे,
जलते आंगारों पर सो गये,
खो गये सब कुछ,
चकाचौंध में खो गये।
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