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Friday, September 19, 2014

बहुत मुश्किल है,
सीलन से बजबजाते दिवारों के,
अंदर बैठ कर धूप से मिलना,
सिर्फ रोटी की खातिर,
अपने सांसों को गिरवी रख,
उन्मुक्त साँस की कामना करना,
ये घुटन अपाहिज बना दे,
इसके पहले,
दिवारों को तोड़ना होगा,
भले ही छत ना रहे सर पर,
स्वच्छ हवा तो मिलेगी,
गुनगुने धूप का स्पर्श पाकर,
मन में ताजगी तो भरेगी,
हड्डियों में ताकत भी भरेगी,
स्वच्छंदता, अपने आप में एक वरदान है.................मनोरंजन

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